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    Home»पंजाब»राशन वितरण प्रणाली के डिजीटलाईज़ेशन के साथ विभाग के कामकाज में आया क्रांतिकारी बदलाव-आशु
    पंजाब

    राशन वितरण प्रणाली के डिजीटलाईज़ेशन के साथ विभाग के कामकाज में आया क्रांतिकारी बदलाव-आशु

    By Himachal VartaDecember 29, 2020
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    चंडीगढ़ (हिमाचलवार्ता)। कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राज्य में सरकारी राशन वितरण प्रणाली के लिए स्मार्ट राशन कार्ड लागू करने से डिजीटलाईज़ेशन की दिशा में पंजाब राज्य द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है, जिससे विभाग के कामकाज में क्रांतिकारी बदलाव भी आया है। उक्त प्रगटावा पंजाब के खाद्य एवं सिविल सप्लाई मंत्री श्री भारत भूषण आशु के द्वारा किया गया।

    उन्होंने बताया कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में साल 2017 के दौरान राज्य में सत्ता संभालने वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार द्वारा राज्य के लोगों को अनाज वितरण प्रणाली के लिए स्मार्ट कार्ड बनाने और इस स्कीम का डिजीटाईज़ेशन करने का वायदा किया गया था, जिसको पूरा किया गया है और इस वायदे के पूरे होने से ज़रूरतमंदों तक अनाज को पहुँचाना यकीनी हो जायेगा। इस स्कीम के अधीन राज्य के 37 लाख परिवारों के 1.41 करोड़ लोगों को सीधे तौर पर लाभ होगा। इसके अलावा पंजाब सरकार द्वारा राज्य के ऐसे परिवार जोकि स्मार्ट राशन कार्ड स्कीम के अधीन नहीं आ सके, उनके लिए स्टेट सपांस्र्ड स्कीम शुरू की गई है, जिसके अधीन राज्य के 2,37,200 परिवारों (1 परिवार के 4 सदस्य) के 9,48,801 सदस्यों को लाभ होगा।

    उन्होंने कहा कि सत्ता संभालने के साथ ही कैप्टन सरकार द्वारा साल 2017 के दौरान सरकार द्वारा राज्य के कुछ जिलों में पायलट प्रोजैक्ट के तौर पर गेहूँ का वितरण बायोमैट्रिक माध्यम के द्वारा ई पोस मशीन द्वारा किया गया था। इससे स्कीम के अधीन पूरी पारदर्शिता के साथ गेहूँ का वितरण किया गया। इसी तरह साल 2018 से लगातार अब तक पूरे राज्य में गेहूँ का वितरण ऑनलाईन ई.पोस मशीनों के द्वारा ही किया जा रहा है, जिससे किसी भी तरह की होने वाली डायवरशन को ख़त्म किया गया है और इस कल्याण स्कीम का लाभ केवल योग्य लाभपात्रियों को ही मिलना यकीनी बनाया गया। राज्य में कांग्रेस सरकार आने पर राज्य के डीपू होल्डरों की आमदन में वृद्धि करने के लिए लिए गए एक अहम फ़ैसले के सम्मुख राज्य के समूह डीपू होल्डरों को गेहूँ का वितरण करने पर पहले प्राप्त हो रहे 25 रुपए प्रति क्विंटल मारजिऩ को 50 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया था।

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