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    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»गिरिपार में शाही कहलाने वाला चार दिवसीय माघी त्योहार संपन्न
    सिरमौर

    गिरिपार में शाही कहलाने वाला चार दिवसीय माघी त्योहार संपन्न

    By Himachal VartaJanuary 15, 2022
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    नाहन संजय सिंह 15 जनवरी (हिमाचलवार्ता न्यूज़ ) :- सिरमौर जनपद की सदियों पुरानी लोक संस्कृति व परंपराओं को संजोए रखने के लिए मशहूर गिरिपार क्षेत्र मे साल का सबसे खर्चीला व शाही कहलाने वाला चार दिवसीय माघी त्यौहार  साजे के नाम से मनाई जाने वाली मकर संक्रांति पर परम्परा के अनुसार समपन्न हो गया।‌
    मकर संक्रांति पर सभी घरों में पटांडे व असकली आदि घी, खीर व दाल के साथ खाए जाने वाले पारंपरिक व्यंजन पकते है और माघ मास के पहले दिन किसी भी घर में मांसाहारी भोजन नहीं पकता। साजे के नाम से मनाई जाने वाली मकर संक्रांति पर लोग अपने कुल देवता को अनाज व घी की भेंट चढ़ाते हैं।
    करीब तीन लाख की आबादी वाले गिरिपार की 144 पंचायतों में सदियों से यह त्यौहार इसी अंदाज में मनाया जाता हैं। बर्फ अथवा कड़ाके की ठंड से प्रभावित रहने वाली गिरिपार अथवा ग्रेटर सिरमौर की विभिन्न पंचायतों में हालांकि दिसंबर माह की शुरुआत से ही मांसाहारी लोग अन्य दिनों से ज्यादा मीट खाना शुरु कर देते हैं, मगर 11 से 14 जनवरी तक चलने वाले माघी त्यौहार के दौरान क्षेत्र के मांसाहारी परिवारों द्वारा शुरुआती तीन दिनों के बकरे काटे जाने की परंपरा भी अब तक कायम है।
    इस त्यौहार में शाकाहारी लोगों के लिए कई पारम्परिक व्यंजन परोसे जाते हैं, जिनमें मूड़ा, तेलवा, शाकुली , तेलपकी , सीड़ो , पटांडे व अस्कली आदि शामिल हैं। माघी त्यौहार को खड़ियांटी , डिमलांटी, उत्तरांटी व साजा अथवा संक्रांति के नाम से मनाया जाता है।
    इस त्यौहार के चलते इस बार भी क्षेत्र में अचानक बकरों की कीमत में उछाल आ गया था तथा मीट अथवा बकरे 500 रुपए किलो तक बिके। गिरिपार के अंतर्गत आने वाले सिरमौर जिला के विकास खंड संगड़ाह, शिलाई व राजगढ़ में हालांकि 90 फीसदी के करीब किसान परिवार पशु पालते हैं, मगर पिछले चार दशकों में इलाके के युवाओं का रुझान सरकारी नौकरी, नकदी फसलों व व्यवसाय की और बढ़ने से क्षेत्र में बकरियों को पालने का चलन घटा है।
    मीट का कारोबार करने वाले व्यापारियों द्वारा राजस्थान, सहारनपुर, नोएडा व देहरादून आदि मंडियों से क्षेत्र में बड़े-बड़े बकरे उपलब्ध करवाए जाते हैं। क्षेत्र के विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के सर्वेक्षण के मुताबिक गिरीपार में लोहड़ी के दौरान मनाए जाने वाले माघी त्यौहार पर हर वर्ष करीब 40 हजार बकरे कटते हैं। माघी त्यौहार के लिए खरीददारी का दौर जोरों पर है तथा क्षेत्र के बाजारों में सामान्य से ज्यादा भीड़ है।
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