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    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर बचत भवन में वर्चुअल माध्यम से सुना मुख्यमंत्री का संदेश
    सिरमौर

    अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर बचत भवन में वर्चुअल माध्यम से सुना मुख्यमंत्री का संदेश

    By Himachal VartaJune 26, 2022
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    नाहन 26 जून -( हिमाचलवार्ता न्यूज) अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर आज यहाँ बचत भवन में आबकारी एवं कराधान विभाग द्वारा नशा नहीं जिंदगी चुनो कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यातिथि मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का संदेश वर्चुअल माध्यम से सुना गया।
    इस अवसर पर उपायुक्त सिरमौर रामकुमार गौतम सहित सहायक आयुक्त घनश्याम दास, उपायुक्त आबकारी एवं कराधान नविंद्र सिंह, सहायक आयुक्त ज्योति स्वरूप सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
    मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने बताया कि राज्य में नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सीआईडी और राज्य कर एवं आबकारी विभाग के अधिकारियों की अध्यक्षता में एक विशेष कार्य बल (टास्क फोर्स) का गठन किया जाएगा।
    जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए एकीकृत नशा मुक्ति नीति अपनाई गई है। इसके लिए राज्य सरकार ने नशा निवारण बोर्ड का गठन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य कर एवं आबकारी विभाग में पुलिस कर्मियों के 73 पद सृजित कर भरे जाएंगे ताकि आबकारी एनडीपीएस और अन्य नियामक कानूनों को प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे न केवल सरकार के राजस्व की बचत होगी बल्कि इससे नशीली दवाओं के खतरे से समग्र रूप से निपटने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने इस अवसर पर आबकारी पुलिस बल की प्रक्रिया का शुभारम्भ भी किया।
    जय राम ठाकुर ने कहा कि नशाखोरी के खिलाफ अभियान को जन आंदोलन बनाना समय की मांग है तभी नशे जैसी बुराई को खत्म किया जा सकता है और युवा पीढ़ी को इस सामाजिक बुराई से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के इस समय में नशे के खतरे पर अंकुश लगाना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने नशीले पदार्थों की तस्करी में संलिप्त लोगों को पकड़ने के लिए पुलिस विभाग को एक कदम आगे रहने का परामर्श दिया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ बेहतर तालमेल आवश्यक है तभी नशीले पदार्थों की तस्करी की श्रृंखला को तोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी पहल पर ही इस क्षेत्र में नशीली दवाओं के खतरे को रोकने के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के पंचकुला में एक बैठक आयोजित की गई जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सभी मुख्यमंत्रियों और अन्य उत्तरी राज्यों के अन्य प्रतिनिधियों ने मादक पदार्थों की तस्करी के संबंध में जानकारी साझा करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पंजाब द्वारा एक और बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने भी भाग लिया।
    जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1100 के अन्तर्गत एक विशेष नशा मुक्ति हेल्पलाइन भी शुरू की है। उन्होंने कहा कि इस हेल्पलाइन का उद्देश्य मरीजों को परामर्श और मार्गदर्शन प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए मादक पदार्थों की तस्करी को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा है। उन्होंने कहा कि राज्य में नशीली दवाओं की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है, क्योंकि यह प्रदेश व देश में एक गंभीर सामाजिक समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने नशीली दवाओं की समस्या से निपटने के लिए प्रदेश को नशा मुक्त राज्य बनाने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है। नशीली दवाओं के खिलाफ रणनीति मुख्य रूप से भांग और अफीम जैसे पौधों से प्राप्त कुछ मादक पदार्थों पर केंद्रित है। राज्य सरकार ने इन मादक पदार्थों केे उत्पादन वाले पौधों की खेती के खिलाफ और उन्मूलन के लिए कड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नशा तस्करों और इसके अवैध व्यापार में शामिल लोगों की लगभग 20 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।
    जय राम ठाकुर ने अभिभावकों को भी सलाह दी कि वे अपने बच्चों के व्यवहार और उसमें होने वाले परिवर्तन पर निगरानी रखें और अभिभावक अपने बच्चों के साथ समय व्यतीत करें। उन्होंने शिक्षकों से स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों के आस-पास चल रही गतिविधियों पर नजर रखने का भी आग्रह किया, क्योंकि नशा तस्कर इन संस्थानों को विशेष रूप से निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिस योजना के तहत समय-समय पर स्कूलों और कॉलेजों के पास युवाओं में नशीली दवाओं के खतरों को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने चाहिए।

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