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    सिरमौर

    मैदानी क्षेत्रों में धान की फसल रोग की चपेट में आने से किसान परेशान

    By Himachal VartaJuly 31, 2022
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    नाहन  (हिमाचल वार्ता न्यूज) :- जिला सिरमौर के मैदानी क्षेत्रों में धान की फसल रोग की चपेट में आई हुई है। जिससे किसान परेशान हैं। जिसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों के खेतों का निरीक्षण कर उन्हें इस समस्या के समाधान के बारे में जागरूक कर रहे हैं और अनेकों किसान व्यक्तिगत रूप से भी फसल के नमूने ले कर कृषि विज्ञान केंद्र का रुख कर रहे हैं।

    वैज्ञानिक भी उन्हें बीमारी के कारणों व  निदान की जानकारी उपलब्ध करवा रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, सिरमौर (धौलाकुआं) के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि जिला के मैदानी क्षेत्रों से धान की फसल के रोगग्रस्त होने की सूचना के बाद केंद्र के वैज्ञानिक किसानों के खेतों में निरीक्षण कर उन्हें इसके नियंत्रण के उपाय बता रहे हैं I

    कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों डॉ. सौरव शर्मा एवं डॉ. शिवाली धीमान ने बताया कि जिन किसान भाइयों ने धान की फसल की रोपाई मई महीने व जून के प्रथम सप्ताह में की है उसमें ज़्यादा समस्या आ रही है।

    जिसके मुख्य कारणों में  दिन का तापमान सामान्य से अधिक होना, पिछले कई वर्षों से एक ही फसल चक्र एवं किस्मों का इस्तेमाल एवं फलस्वरूप मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, धान की जड़ों में कीट एवं रोग का प्रकोपI उपरोक्त समस्याओं के समाधान हेतु वैज्ञानिकों ने निम्नलिखित उपाय बताए जिससे किसान लाभ उठा सकते है।

    फसल में पोटाश की कमी की दूर करने के लिए 0:0:50 घुलनशील उर्वरक का फसल पर छिड़काव करें जिसकी मात्रा 1.5 किलोग्राम प्रति 150 लीटर पानी में प्रति एकड़ है I

    (प्रति बीघा के लिए 300 ग्राम प्रति 30 लीटर पानी में)। ज़िंक की कमी को दूर करने के लिए चीलेटेड ज़िंक 100 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें (प्रति बीघा 20 ग्राम प्रति 30 लीटर पानी में)।

    आयरन की कमी से भी पत्ते हल्के पीले नज़र आने शुरू होते हैं  जिसके लिए 1 % फेरस सल्फ़ेट का छिड़काव करें जिसकी मात्रा 150 लीटर पानी में 1.0 किलोग्राम प्रति एक एकड़ में होगी (प्रति बीघा 200 ग्राम प्रति 30 लीटर पानी में). बीमारी के नियंत्रण के लिए सोफिया दवाई  (हैकसाकोनाजोल 4%+ कार्बेनडाज़िम 16% एस सी) की 100 ग्राम मात्रा प्रति 30 लीटर पानी में या साफ दवाई (कार्बेनडाज़िम 12%+ मैनकोज़ेब 63% डब्ल्यू पी) की 100 ग्राम मात्रा प्रति 30 लीटर पानी में और

    हारू दवाई (टेबुकोनाज़ोल 10%+ सल्फर 60% डब्ल्यू पी) की 30 ग्राम मात्रा प्रति 30 लीटर पानी में मिलाकर एक बीघा में छिड़काव करें। क्लोरपाईरिफॉस् 20 ईसी की 200 मिली. ली. मात्रा को 2-3 किलोग्राम रेत में मिलाकर एक बीघा में डालें। इन उपायों को करने से धान की फसल में आ रही परेशानी से किसानों को राहत मिल सकती है।

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