
नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज) ( रेणु ब्यास): – जिला सिरमौर के गिरिखंड क्षेत्र में सभी त्यौहार पारंपरिक और अलौकिक होते है। इनमे एक त्यौहार बूढ़ी दिवाली भी है। बूढ़ी दिवाली क्षेत्र का ऐसा त्यौहार है जो गिरीखण्ड क्षेत्र के सामाजिक रहन – सहन, आपसी भाईचारे सहित बाहर से आए मेहमानों के लिए अलग तरह का मनोरंजन देता है। यहां दशकों से मनाएं जाने वाले पारंपरिक बूढ़ी दिवाली पर्व की खुशबू अमेरिका तक पहुंचती है। पर्व का आनंद लेने के लिए लोग बाहरी देशों से गिरीखण्ड क्षेत्र में पहुंचते है और गिरिखंड क्षेत्र का कल्चर, वेशभूषा, बोली सहित बूढ़ी दिवाली त्योहार की झलकियां अपने कैमरों में कैद कर लेते है। बूढ़ी दिवाली पर्व गिरिखंड क्षेत्र के साथ – साथ उत्तराखण्ड प्रदेश के बावर जौनसार और मंडी जिला के निरमंड में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। बूढ़ी दिवाली पर्व गिरिखंड क्षेत्र के अलग अलग गांवों में 5 से 7 दिनों तक मनाया जाता है। पर्व के दौरान स्थानीय लोक संस्कृति देखने को मिलेगी, बूढ़ी दिवाली त्यौहार अमावस्या के दिन से शुरू हो जाएगा। अमावस्या की रात्रि को बलिराज दहन किया जाएगा तथा गांव, क्षेत्र व देश से बुराइयों को खत्म करने की कसमें लेने के बाद दिवाली पर्व का शुभारंभ होगा। दूसरे दिन क्षेत्र की बेटी “भियुरी” की याद में विरह गीत गाया जाएगा। उसके बाद अगले पांच दिनों तक क्षेत्र में पारंपरिक लोक नाटियों सहित हारूल नृत्य का दौर चलता रहेगा, दर्जनों जगह गांव में स्थानीय लोगों द्वारा रामलीला, हिरण नृत्य, हाथी नृत्य सहित अन्य कई तरह के खेल कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। मेहमानों के लिए पारंपरिक पकवानों सहित ड्राई व्यंजन परोसे जाएंगे।बूढ़ी दिवाली त्यौहार को लेकर गांव की महिलाएं तैयारियों में जुट गई है। महिलाएं इन दिनों अपने अपने घरों में ड्राई व्यंजनों में शाकुली, मुड़ा, रेवड़ी सहित दर्जनों किस्म के पकवान बना रही है। जिन्हे बूढ़ी दिवाली त्यौहार के दौरान मेहमानों सहित बाहर से आए पर्यटकों को परोसा जाएगा। 24 नवम्बर से होने वाले बूढ़ी दिवाली पर्व को लेकर लोग जरूरी सामान की खरीदारी करने लगे है।गिरिखंड क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली त्यौहार आदिकाल से लेकर मनाया जाता है। क्षैत्र में हुई कई घटनाओं के साथ बूढ़ी दिवाली त्यौहार को जोड़ा जाता है और कई पारंपरिक घटनाओं का जिक्र यहां बूढ़ी दिवाली के दौरान लोक नाटी और हारूल नृत्य के दौरान गाई जाने वाली लोक गाथाओं में मिलता है। इसमें सबसे मशहूर “भियूरी” गीत है। जिसे बिना किसी वाद्य यंत्रों के गाया जाता है। भियूरी गीत को लेकर मान्यता है कि भियुरी क्षेत्र की लडकी का नाम था। जिसका हरण जैसलमेर के राजा ने किया था। बताया जाता है कि दिवाली के दिन माइके आते हुए भियुरि की एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। जिसके कारण क्षेत्र में दिवाली पर्व को एक माह बाद “बूढ़ी दीवाली त्यौहार” के नाम से मनाया जाता है। किदवंती में राजा बलि का जिक्र भी आता है। बेरहाल गिरिखंड क्षेत्र में इन दिनों बूढ़ी दिवाली त्यौहार को लेकर तैयारियां जोरों पर है और 24 नवम्बर से समूचे गिरिखंड क्षेत्र के अंदर बूढ़ी दिवाली त्यौहार को हर्षोल्लास से मनाया जाएगा।