नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज) (एसपी जैरथ) :- फाल्गुन मास में देश के हर हिस्से में होली पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। रंगों के इस पर्व को देश में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। खुशी और उमंग लिए होली का पर्व हिमाचल के ऐतिहासिक व धार्मिक नगरी पांवटा साहिब में होला मोहल्ला उत्सव के रूप में मनाया जाता है। गुरु गोविंद सिंह द्वारा शुरू किए गए होला मोहल्ला को पांवटा साहिब में सदियों से मनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिखी कौम में वीरता का रस भरने के लिए किया था। होला शब्द होली से और मोहल्ला शब्द मय और हल्ला शब्द से बना है, जिसमें मय का अर्थ बनावटी और हल्ला का अर्थ हमला होता है। इस तरह गुरु साहिब ने होली के पर्व पर दो टोली बनाकर सिखों में वीरता के जज्बे को बढ़ाने के लिए इसकी शुरुआत की थी। पांवटा साहिब में गुरु गोविन्द सिंह जी ने अपने जीवन के साढ़े चार साल बिताये और यहाँ के भगाणी साहिब में अपने जीवन का पहला धर्म युद्ध लड़ा जिसमे फ़तेह हासिल की। पवित्र यमुना नदी के तट पर उन्होंने कवि दरबार भी शुरू किया था जिसमे उच्च कोटि के कवि अपनी रचनाएँ सुनाया करते थे। आज भी इस परंपरा को जीवित रखा गया है। होला मोहल्ला के दौरान यहाँ कवि दरबार का आयोजन किया जाता है। पांवटा साहिब में 3 मार्च से होला मोहल्ला पर्व शुरू हो रहा है जिसको लेकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पांवटा साहिब द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर दी गयी है। 3 मार्च से अखंड पाठ के साथ होला मोहल्ला शुरू होगा जिसमे देश विदेश से सिख संगतें पांवटा साहिब पहुंचेगी। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधक सरदार जगीर सिंह ने बताया की होला मोहल्ला पर्व को लेकर 3 मार्च से लेकर 8 मार्च तक गुरुद्वारा पांवटा साहिब में कई कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
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Sunday, October 18
