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    Home»हिमाचल प्रदेश»ऊना»सहकारिता विभाग द्वारा प्रमाणित अंकेक्षण संघ ने उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री को ज्ञापन प्रेषित किया।
    ऊना

    सहकारिता विभाग द्वारा प्रमाणित अंकेक्षण संघ ने उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री को ज्ञापन प्रेषित किया।

    By Himachal VartaJune 25, 2023
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    ऊना ( हिमाचल वार्ता न्यूज़  )   सहकारिता विभाग द्वारा प्रमाणित अंकेक्षण संघ ने शनिवार को परिधि गृह ऊना में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री से भेंट कर ज्ञापन प्रेषित किया। इस दौरान संघ के प्रतिनिधियों ने अपने वेतनमान व तय फीस समस्या उपमुख्यमंत्री के समक्ष रखी। संघ के प्रतिनिधियों साक्षी चौहान, अंजना, रूबिना जरियाल, नीरज डढवाल, अनुराधा, प्रिया शर्मा, पेश, अमित सांभर, कमांशु प्रभाकर, विपिन आदि ने कहा कि सहकारिता विभाग के कार्यांे के लिए स्वरोजगार योजना के माध्यम से 250 लेखा परीक्षकों को निधार्रित किया गया है। जिसके लिए सभा के लाभ में से दस प्रतिशत व अधिकतम 20000 और न्यूनतम 1000 रुपए फीस तय की गई थी। जिसके लिए ऑडिटर्स 2021 से अपना कार्य निष्ठा व ईमानदारी से कर रहे है। प्रदेश सरकार द्वारा 2019 में सहकारी सभााओं को ऑडिट करवाने की छुट दी, जिसमें ऑडिटर का नाम चयन करने का भी प्रबंधन कमेटी को प्राथमिकता दी। ऐसे में इन सब नियमों के अंतर्गत ऑडिट भी सही रूप से नहीं किया जा रहा है। ऑडिट के लिए श्रेणी ए, बी, सी व डी की सभाएं ऑडिट के लिए दी जा रही है, जिनकी संख्या जिला ऊना में कम है तथा शुल्क फीस भी बहुत ही कम है। इसलिए हमें ऑडिट के लिए श्रेणी ए की सहकारी सभाएं दी जाए।इसके साथ ऑडिट के लिए निधार्रित फीस 1000 रुपए से हटाकर कार्यशील पूंजी के आधार पर किया जाए। अकसर काम जादा होने की वजह से ऑडिट में एक माह का समय लग जाने के बाद मात्र 1000 रुपए मिलना बहुत ही कम है और मिलने वाली फीस भी समय से नहीं मिल रही है। 2015 में ऑडिट फीस को बढाया गया था, तब से लेकर अब तक आठ वर्ष में कोई फीस नहीं बढाई गई है, जिसे बढाया जाए। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि सहकारी सभाओं के ऑडिट करने के लिए स्वतंत्रता प्रदान की जाए, ताकि ऑडिटर्स कार्य को सही रूप से कर सके। सरकार अधिकतम 20 सहकारी सभाओं का ऑडिट करने की सीमा तय करें। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि रिटायर्ड निरीक्षकों को ऑडिट कार्य न दिया जाए, क्योंकि रिटायर्ड निरीक्षकों को पेंशन दी जा रही है। इसके साथ सचिव व प्रबंधक कमेटी की मनमानी पर रोक लगाई जाए। वहीं ऑडिट करने वाले ऑडिटर्स के लिए वेतनमान भी निधार्रित किया जाए।

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