बिलासपुर ( हिमाचल वार्ता न्यूज़ ) हिमाचल प्रदेश को विकास की दौड़ में शामिल करने के लिए किरतपुर-मनाली हाईवे तो मिला लेकिन निर्माण के लिए प्रकृति से हुई छेड़छाड़ का मुआवजा लोगों को अपना सब कुछ गंवाकर भरना पड़ रहा है। हाल ही में प्रदेश में पहली ही बरसात में हुई तबाही इसका पुख्ता सबूत है। इस फोरलेन के निर्माण के लिए पहाड़ों का 90 डिग्री पर बेतरतीब कटान, खुली ब्लास्टिंग, अवैध डंपिंग, बेइंतहा माइनिंग ने पहाड़ों को तो खोखला किया ही, साथ ही नदी-नालों के रास्ते भी बंद कर दिए हैं। इस परियोजना के निर्माण के लिए लाखों टन मिट्टी पहाड़ों से निकाली गई, लेकिन उसे प्रदेश के बिलासपुर, मंडी, कुल्लू जिले के नदी-नालों और झील के किनारे डंप कर दिया। फोरलेन तो बनकर तैयार हो गया, लेकिन इन नदी-नालों को मक डंपिंग ने हमेशा के लिए बंद कर दिया। हालांकि, कोर्ट के आदेशों के बाद अवैध डंपिंग को हटाने की कागजी कार्रवाई तो हुई, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बहुत अलग है। किरतपुर से मनाली तक इस फोरलेन के लिए फोरलेन और टूलेन को मिलाकर कुल 21 टनल, 30 मेजर पुलों का निर्माण किया गया है। इनके निर्माण के लिए ब्लास्टिंग हुई, पहाड़ कटे और कहीं न कहीं कच्चे पहाड़ इनके निर्माण के बाद और कमजोर हो गए हैं।
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Sunday, October 18
