Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Breakng
    • स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनाव जनमत संग्रह साबित हुए, जनता ने कांग्रेस सरकार को पूरी तरह नकारा : डॉ. राजीव बिंदल
    • ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण से सिरमौर की युवतियां हो रही आत्मनिर्भर
    • आदेश जारी
    • पर्यावरण-अनुकूल विकास: संकटों के बीच समृद्ध हिमाचल का नया ब्लूप्रिंट
    • प्रदेश सरकार सड़कों का नेटवर्क बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत- विक्रमादित्य सिंह
    • आमजन को बेहतर परिवहन सुविधाएं प्रदान करना व हरित परिवहन को बढ़ावा देना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता- मुकेश अग्निहोत्री
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Himachal Varta
    • होम पेज
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सिरमौर
      • ऊना
      • चंबा
      • लाहौल स्पीति
      • बिलासपुर
      • मंडी
      • सोलन
      • कुल्लू
      • हमीरपुर
      • किन्नोर
      • कांगड़ा
    • खेल
    • स्वास्थ्य
    • चण्डीगढ़
    • क्राइम
    • दुर्घटनाएं
    • पंजाब
    • आस्था
    • देश
    • हरियाणा
    • राजनैतिक
    Wednesday, June 3
    Himachal Varta
    Home»हिमाचल प्रदेश»चंबा»मां गौरी ने भगवान शंकर को पाने के लिए कठोर तप यहीं पर किया था: महंत आकाश गिरी
    चंबा

    मां गौरी ने भगवान शंकर को पाने के लिए कठोर तप यहीं पर किया था: महंत आकाश गिरी

    By Himachal VartaSeptember 14, 2023
    Facebook WhatsApp

    चंबा ( हिमाचलवार्ता न्यूज़ )    मणिमहेश यात्रा के दौरान गौरीकुंड पड़ाव से श्रद्धालु गंगाजल लेकर नहीं जाते हैं। मान्यता है कि गौरीकुंड के पास से जब कोई गंगाजल लेकर गुजरता है तो कुंड के पानी में उबाल आने लगता है। इतना ही नहीं, यदि कोई गलती से भी गौरीकुंड में गंगाजल की एक बूंद भी डाल दे तो यह कुंड पूरी तरह सूख जाता है। ऐसे में जो भी श्रद्धालु डल झील पर गंगा जल चढ़ाने के लिए लाते हैं, वे दूसरे रास्ते से ही अगले पड़ाव के लिए रवाना हो जाते हैं। महंत आकाश गिरि और महाकाल गिरी बताते हैं कि मां गौरा ने भगवान शंकर को पाने के लिए कठोर तप यहीं पर किया था। आज भी देवता यहां भगवान शंकर की भक्ति में लीन रहते हैं। महंत आकाश गिरी और महाकाल गिरी बताते है कि गौरीकुंड मां की तपस्थली है। यहां आज भी देवता भगवान शंकर की तपस्या में लीन हैं।गौरीकुंड में स्नान के बाद सुहागी चढ़ाती हैं महिलाएं
    बता दें कि गौरीकुंड समुद्रतल से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर है। माता गौरा के इस पड़ाव की अपने आप में विशेष महत्ता है। खासतौर पर महिलाएं गौरीकुंड पर स्नान करने के बाद माता की चिह्न रूपी मूर्ति की पूजा-अर्चना करती हैं। सुहागिन महिलाएं माता को सुहागी का सामान चढ़ाती हैं। मां से सुहाग की लंबी उम्र का वर मांगती है। अविवाहित युवतियां योग्य और मनवांछित वर मांगती हैं। गौरीकुंड पहुंचते ही खत्म हो जाती है 10 किमी की चढ़ाई चढ़ने की थकान
    पवित्र मणिमहेश यात्रा के सुंदरासी पड़ाव से आगे श्रद्धालु भैरोंघाटी और ग्लेशियर प्वाइंट से होकर अपने अगले पड़ाव गौरीकुंड पहुंचते हैं। गौरीकुंड पड़ाव पर पहुंचते ही 10 किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ने की थकान एकदम दूर हो जाती है। यहां करीब से भगवान शंकर के कैलाश के दर्शन पाकर मन गदगद हो जाता है। यह मां गौरा का पवित्र पावन धाम है। गौरीकुंड पड़ाव में माता गौरा की संगमरमर की मूर्ति के साथ पवित्र भी कुंड है। इस पवित्र कुंड में स्त्रियां ही स्नान करती है। सुंदरासी से श्रद्धालु जब गौरीकुंड पहुंचते हैं तो कुछ पल के लिए जरूर रुकते हैं।

    Follow on Google News Follow on Facebook
    Share. Facebook Twitter Email WhatsApp
    Recent
    • स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनाव जनमत संग्रह साबित हुए, जनता ने कांग्रेस सरकार को पूरी तरह नकारा : डॉ. राजीव बिंदल
    • ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण से सिरमौर की युवतियां हो रही आत्मनिर्भर
    • आदेश जारी
    • पर्यावरण-अनुकूल विकास: संकटों के बीच समृद्ध हिमाचल का नया ब्लूप्रिंट
    • प्रदेश सरकार सड़कों का नेटवर्क बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत- विक्रमादित्य सिंह
    Recent Comments
    • Sandeep Sharma on केन्द्र ने हिमालयी राज्यों को पुनः 90ः10 अनुपात में धन उपलब्ध करवाने की मांग को स्वीकार किया
    • Sajan Aggarwal on ददाहू मैं बिजली आपूर्ति में घोर अन्याय
    © 2026 Himachal Varta. Developed by DasKreative.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.