शिमला ( हिमाचल वार्ता न्यूज)भारतीय हिमालयी क्षेत्र जैविक विविधता का मेगा हॉटस्पॉट है। इस क्षेत्र में औषधीय पौधों की लगभग 1748 प्रजातियां हैं। इनके संरक्षण के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत है। ये शब्द मुख्य वन अरण्यपाल (सेवानिवृत्त) एसएस कटैक ने सोमवार को हिमालय वन अनुसंधान संस्थान शिमला में भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से महत्त्वपूर्ण औषधीय पौधों की खेती और विविधिकरण और आय बढ़ाने के लिए विकल्प तलाशने को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कहे। उन्होंने हितधारकों को औषधीय पौधे उगाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि जंगलों में औषधीय पौधों का संरक्षण जरूरी है।मुख्य तकनीकी अधिकारी और प्रशिक्षण को-ऑर्डिनेटर/समन्वयक डा. जोगिंद्र चौहान ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य औषधीय पौधों की खेती की जानकारी अन्य हितधारकों तक पहुचाना है, ताकि वे मास्टर ट्रेनर के रूप में जानकारी को अन्य लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिमालय वन अनुसंधान संस्थान शिमला, जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर, डा. यशवंत सिंह परमार, डा. वाईएस परमार बागबानी और वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन, गैर सरकारी संगठन के वैज्ञानिक अधिकारी औषधीय पौधों से संबंधित विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया।
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Thursday, June 4
