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    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»दो दशक बाद भी पक्की नहीं हुई उद्योग मंत्री के गृह क्षेत्र की सड़क – तोमर
    सिरमौर

    दो दशक बाद भी पक्की नहीं हुई उद्योग मंत्री के गृह क्षेत्र की सड़क – तोमर

    By Himachal VartaFebruary 14, 2024
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    नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज) (एसपी जैरथ):- उद्योग मंत्री हर्ष वर्धन चौहान के गृह विधानसभा क्षेत्र की रास्त-मानल-चुनोटी सड़क बीते 24 वर्षों से जर्जर हालत में है। लगभग 5 ग्राम पंचायतों के 15 गांव के हजारों ग्रामीण पिछले दो दशकों से सड़क की दयनीय स्थिति में सुधार का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कई दुखद सड़क दुर्घटनाओं में अनेकों निर्दोष लोगों की जान जाने के बावजूद भी सड़क के निर्माण के बाद से लेकर आज तक एक बार भी इस सड़क पक्का नहीं किया गया है। शिलाई लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंडल के अंतर्गत आने वाले उप-मंडल रोनहाट की रास्त-मानल-चुनोटी सड़क को सरकार द्वारा लगातार उपेक्षित किया गया है, जिसकी गवाही इसकी वर्तमान खस्ताहालत स्वयं दे रही है। पूर्व भाजपा विधायक बलदेव तोमर ने नाहन में बताया कि   सड़क का निर्माण वर्ष 2000 में किया गया था , लेकिन यह अभी भी ऊबड़ खाबड़ और जर्जर हालत में है, दुर्घटनाओं की संभावनाओं के चलते यहां सफर करने वाले यात्रियों की जान को अक्सर गंभीर खतरा बना रहता है। इस मामले पर ध्यान न दिए जाने से स्थानीय लोगों को काफी असुविधा हो रही है जो अपने दैनिक आवागमन के लिए इसी सड़क पर निर्भर हैं। संबंधित अधिकारियों के पास दर्ज की गई कई शिकायतों के बावजूद आवश्यक फॉरेस्ट क्लियरेंस एक्ट ( एफसीए ) मंजूरी जो सड़क के विकास में प्राथमिक बाधा है, वो लगातार अनसुलझी बनी हुई है। इस मुद्दे को तुरंत हल करने में संबंधित अधिकारियों की ओर से गंभीरता की कमी के कारण देरी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। तक़रीबन 15 किलोमीटर लंबी सड़क, जिसे रोड़ कनेक्टिविटी में सुधार के लिए बनाया गया था, अब सरकारी और नौकरशाही उदासीनता के प्रमाण के रूप में खड़ी है। 
    ये सभी आरोप लगाते हुए स्थानीय कांग्रेसी नेता रविंद्र ठाकुर , पूर्व प्रधान यशपाल ठाकुर , पूर्व प्रधान जीत सिंह , नंबरदार अजय पोजटा , संत राम , दौलत राम , जगत सिंह और मंगल सिंह आदि ने बताया कि सड़क की हालत न केवल स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को दुर्घटना के भय से प्रभावित करती है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान में प्रशासनिक मशीनरी की दक्षता पर भी सवाल उठाती है। दुर्भाग्य से स्थानीय निवासियों और यात्रियों को सरकारी और प्रशासनिक निष्क्रियता के परिणामों से जूझना पड़ रहा है। पिछले दो दशकों से रास्त-मानल-चुनोटी रोड की लंबित वन मंजूरी एक महत्वपूर्ण बाधा है जो संबंधित अधिकारियों से तत्काल ध्यान और समाधान की मांग कर रही है। जब तक आवश्यक कदम नहीं उठाए जाते, यह सड़क सरकारी तंत्र की उस लापरवाही को दर्शाती रहेगी जो इस क्षेत्र की प्रगति और विकास में बाधक बनी हुई है। 
    लोक निर्माण मंडल शिलाई के अधिशाषी अभियंता वीके अग्रवाल ने बताया कि कनिष्ठ अभियंता से मिली जानकारी के अनुसार कई बार वन मंजूरी के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद फाइल वन विभाग को भेजी गई थी। हालाँकि, फ़ाइल कवर बदलने और फ़ाइल वेंडिंग जैसी अनावश्यक क्वेरीज़ लागू करके फ़ाइल को कई बार वापस भेजा गया है।  उन्होंने कहा कि वन विभाग के सुस्त रवैये के कारण दो दशक बाद भी इस सड़क की मेटलिंग और रखरखाव का काम शुरू नहीं हो सका है, जबकि एफसीए मंजूरी के लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और फाइलें वन विभाग के कार्यालय में पड़ी हुई हैं। वन मंडल श्री रेणुका जी के डीएफओ सरदार परमिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने हाल ही में यहां कार्यभार संभाला है। 
    यह मामला यूजर एजेंसी लोक निर्माण मंडल शिलाई के स्तर पर लंबित है। 10 अक्टूबर, 2023 को हिमाचल में वन मंजूरी अधिनियम के नोडल कार्यालय ने कुछ आपत्तियां उठाईं और फ़ाइल को सुधार के लिए उपयोगकर्ता एजेंसी पीडब्ल्यूडी शिलाई को वापस भेज दिया। जिस पर यूजर एजेंसी की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना बहुत जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उपयोगकर्ता एजेंसी द्वारा फॉरेस्ट क्लीयरेंस से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जल्द ही इस सड़क के लिए अनुमति मिल जाएगी।
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