नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज) (एसपी जैरथ):-सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में सदियों पुरानी लोक परंपराएं आज भी जीवंत हैं। बैशाखी पर्व पर यहां पेड़ों पर झूले लगाने की अनोखी परंपरा आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है।सोमवार शाम पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ताल पर रस्सा-कशी और पींग फांदने की रस्म के साथ क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बाबड़ी घास से तैयार मोटी रस्सियों के झूले पेड़ों पर डाले गए। इन झूलों पर झूलना बच्चे ही नहीं, बल्कि बड़े भी शुभ मानते हैं।करीब तीन लाख की आबादी वाले गिरिपार क्षेत्र की लगभग 155 पंचायतों में बैशाखी के मौके पर लोग अपने कुल देवताओं को नया अनाज अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यहां इस पर्व को दो दिन तक मनाया जाता है। दूसरे दिन को ‘बिशु रो साजो’ के रूप में मनाया जाता है, जिसके साथ ही शिलाई, संगड़ाह, राजगढ़ और कफोटा क्षेत्रों में बिशु मेलों का दौर शुरू हो जाता है।बैशाख संक्रांति के पावन अवसर पर चूड़धार स्थित शिरगुल महाराज मंदिर के कपाट भी अगले छह माह के लिए खोल दिए गए हैं। हालांकि यहां भंडारे का आयोजन अगले माह से शुरू किया जाएगा।बिशु मेलों के दौरान तीर-कमान से महाभारत का सांकेतिक युद्ध विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। वहीं, बैशाखी की पूर्व संध्या पर कई गांवों में सामूहिक रूप से बकरा काटने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे ‘बिशवाड़ी’ कहा जाता है।
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Wednesday, July 22
