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    सिरमौर

    राजगढ़ के शिरगुल महाराज का बैसाखी मेला बना राज्य स्तरीय

    By Himachal VartaJune 7, 2026
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    नाहन( हिमाचल वार्ता न्यूज) (एसपी जैरथ):-सिरमौर के राजगढ़ क्षेत्र के लिए गर्व और खुशी की खबर है। क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक माने जाने वाले शिरगुल देवता बैसाखी मेले को हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य स्तरीय मेले का दर्जा प्रदान कर दिया है। प्रदेश मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और लोग इसे राजगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मिली बड़ी मान्यता के रूप में देख रहे हैं।राजगढ़ का बैसाखी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सिरमौर, शिमला और सोलन जिलों के बिशू मेलों की परंपरा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। आराध्य देव शिरगुल महाराज से जुड़ा यह मेला दशकों से लोक आस्था, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का केंद्र रहा है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर न केवल धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हैं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति का भी साक्षी बनते हैं। मेले का इतिहास भी बेहद रोचक और गौरवशाली रहा है। स्थानीय इतिहास के अनुसार करीब 75 वर्ष पूर्व यह मेला वर्तमान ग्राम पंचायत बोहल-टालिया के अंतर्गत कुफरधार में आयोजित किया जाता था। उस समय चीड़ के घने जंगलों और प्राकृतिक जल स्रोत के समीप लगने वाला यह मेला क्षेत्र की सबसे बड़ी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल था। बाद में बढ़ती भागीदारी और क्षेत्रीय जरूरतों को देखते हुए इसे राजगढ़ की सरोट पहाड़ी में स्थानांतरित किया गया।सरोट पहाड़ी में वर्षों तक मेले का आयोजन होता रहा और इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। बताया जाता है कि उस दौर में प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल भी मेले में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
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