नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज)हिमाचल प्रदेश में जल संरक्षण, जलस्रोतों के पुनर्जीवन एवं जल प्रबंधन के क्षेत्र में SARRA (Spring and River Rejuvenation Authority/Project) परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं विभिन्न राज्यों में अपनाए जा रहे उत्कृष्ट मॉडलों के अध्ययन के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड का प्रतिनिधिमंडल इन दिनों उत्तराखंड के अध्ययन भ्रमण पर है।
अध्ययन भ्रमण के दौरान आज प्रतिनिधिमंडल ने लच्छीवाला रेंज एवं लच्छीवाला नेचर पार्क का दौरा किया तथा क्षेत्र में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, स्प्रिंग (जलस्रोत) एवं नदी पुनर्जीवन से संबंधित किए गए कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड वन विभाग द्वारा SARRA के साथ कन्वर्जेन्स मॉडल के अंतर्गत किए जा रहे विभिन्न कार्यों, उनकी तकनीकी संरचना, कार्यान्वयन प्रक्रिया तथा इनके माध्यम से जलस्रोतों एवं जलधाराओं के संरक्षण के प्रयासों की जानकारी प्राप्त की।
भ्रमण के दौरान अधिकारियों के मध्य जल संरक्षण एवं जलस्रोत पुनर्जीवन के लिए विभिन्न विभागों के संसाधनों और विशेषज्ञता को एकीकृत करते हुए कन्वर्जेन्स आधारित मॉडल विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से यह समझने का प्रयास किया कि प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन, जलग्रहण क्षेत्र उपचार तथा नदी-नालों में जल प्रवाह को बनाए रखने के लिए किस प्रकार वैज्ञानिक एवं स्थानीय स्तर के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड की भौगोलिक एवं पर्वतीय परिस्थितियों में अनेक समानताएं होने के कारण इस अध्ययन भ्रमण को दोनों राज्यों के लिए उपयोगी बताया गया। प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड में अपनाई जा रही सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) को समझा तथा इन्हें हिमाचल प्रदेश में जल संरक्षण एवं स्प्रिंग-रिवर रेजुवेनेशन के कार्यों में अपनाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया।
इस अवसर पर उत्तराखंड वन विभाग एवं SARRA के अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को विभिन्न जल संरक्षण कार्यों की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा दोनों राज्यों के बीच अनुभव एवं तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान को भविष्य में और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
