Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Breakng
    • स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शांडिल ने किया विधिवत शुभारम्भ
    • हेल्दी बेबी शो 28 जून को ठोडो मैदान में होगा आयोजित
    • अग्निशमन विभाग का विशेष सत्र: अरिहंत इंटरनेशनल विद्यालय, नाहन में सुरक्षा का संदेश
    • किसान जल्द करवाएं किसान पंजीकरण, मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ – कृषि विभाग
    • मुख्यमंत्री ने जोहड़जी-मल्ला सड़क के लिए 20 करोड़ रुपये की घोषणा
    • अनिरुद्ध सिंह 25 जून को ज़िला सोलन के प्रवास पर
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Himachal Varta
    • होम पेज
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सिरमौर
      • ऊना
      • चंबा
      • लाहौल स्पीति
      • बिलासपुर
      • मंडी
      • सोलन
      • कुल्लू
      • हमीरपुर
      • किन्नोर
      • कांगड़ा
    • खेल
    • स्वास्थ्य
    • चण्डीगढ़
    • क्राइम
    • दुर्घटनाएं
    • पंजाब
    • आस्था
    • देश
    • हरियाणा
    • राजनैतिक
    Friday, June 26
    Himachal Varta
    Home»हिमाचल प्रदेश»जिला सिरमौर में मुख्यमंत्री एक बीघा योजना के अतंर्गत सुरक्षा चक्र एवं माया चक्र का किया समावेश-डा. परूथी
    हिमाचल प्रदेश

    जिला सिरमौर में मुख्यमंत्री एक बीघा योजना के अतंर्गत सुरक्षा चक्र एवं माया चक्र का किया समावेश-डा. परूथी

    By Himachal VartaAugust 30, 2020
    Facebook WhatsApp

    योजना के अतंर्गत ग्रामीण महिलाओं को शाक वाटिका में औषधीय पौधे की खेती कर स्वास्थ्य एवं आर्थिकी को बढाने के लिए किया जा रहा है प्रेरित

    नाहन। हिमाचल सरकार द्वारा मुख्यमंत्री एक बीघा योजना का शुभारंभ 21 मई, 2020 को ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से संगठित स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हिमाचल कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए किया गया जिसके तहत ग्रामीण महिलाओं को अपनी एक बीघा जमीन पर शाक वाटिका स्थापित करने के लिए 1 लाख रूपए तक कि राशी सरकार द्वारा प्रदान की जा रही है। शाक वाटिका में प्राकृतिक खेती के माध्यम से उगाए गए फल, सब्जियां और औषधीय पौधों को बेचकर महिलाएं अपनी आर्थिकी को सुद्ढ करने के साथ-साथ इनका घर में नियमित इस्तेमाल कर अच्छे स्वास्थ्य का लाभ भी ले सकती हैं।
    उपायुक्त सिरमौर डा. आर.केे. परूथी द्वारा जिला में मुख्यमंत्री एक बीघा योजना में नई पहल कर सुरक्षा चक्र व माया चक्र को इस योजना में समावेश कर जिला वासियों को शाक वाटिका में औषधीय पौधे एवं सुगन्धित पौधों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह पौधे मुख्यतः एन्टी-वॉयरल, एन्टी बैक्टीरियल एवं एन्टी-फंगल गुणों से भरपूर है जिनका इस्तेमाल कई बिमारियों के इलाज में किया जाता है। यह व्यक्तियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कारगर सिद्ध होते हैं। यह पौधे व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। इन पौधों का अधिक उत्पादन कर बाजार में अच्छे दाम प्राप्त किए जा सकते है, जिसका सीधा लाभ जिला की ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा और उनकी आर्थिकी भी बढ़ेगी और स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होगा।
    सुरक्षा चक्र की इस पहल के अनुसार सबसे पहले शाक वाटिका को तीन चक्रो में विभाजित किया जाता है। पहले व सबसे बाहरी चक्र में कांटेदार व औषधीय पौधे रोपित किए जाते है, जैसे कश्मल व करौंदा के पौधे। इन पौधों को आवारा पशु नही खाते है और यह पौधे औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। करौंदा पाचन शक्ति बढ़ाता है, डायबिटीज व घाव के उपचार में उपयोगी होने के अतिरिक्त कई बिमारियों को ठीक करने में काम आता है। इन पौधों को घर के चारों ओर लगाने व नित्य सेवन से लोगों में फगल, बैक्टीरियल व वायरल रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
    इसी प्रकार शाक वाटिका के दूसरे चक्र में वह औषधीय पौधे रोपित किए जाते है जिनका उपयोग व्यापारिक खेती की दृष्टि से महत्वपूर्ण है जैसे प्याज, तुलसी, पुदीना व लहसुन। प्याज का उपयोग भूख व पाचन शक्ति बढ़ाता है, शरीर दर्द, कब्ज, पाइल्स में उपयोगी होता है। इसकी तीव्र गंध मच्छरोें को भगाने में सहायक होती है। लहसुन दर्द निवारक, अनचाहे कोलेस्ट्रोल को कम करता है व जोडों के दर्द में हितकारी है। पुदीना पेट दर्द में उपयोगी, भूख एवं पाचन शक्ति बढाता है और तीव्र गंध होने से मक्खियों एवं मच्छरों को भगाने में सहायक सिद्ध होता है। तुलसी खांसी-जुखाम व बुखार में उपयोगी तथा टीबी रोगियों के ईलाज में सहायक है।
    इसी प्रकार, शाक वाटिका के तीसरे चक्र में वह सभी मुख्य पौधे रोपित किए जाते है जैसे की एलोवेरा, शतावरी, हल्दी, अल्सी, पुदीना, तुलसी, सर्पगंध, गिलोय, अश्वगंधा, अदरक, मेहंदी, दारूहल्दी, अन्नार, अमलतास, आमला, अंजीर, बहेड़ा, बेल, हरड, जामुन, काचनर, नीम, सहिजन इत्यादि।
    एलोवेरा खून साफ करने, त्वचारोगों, लीवरटॅानिक, दर्द निवारक, स्त्रीयों मेें मासिक धर्म के समय दर्द, पाईल्स, कब्ज में उपयोगी है। इसके अतिरिक्त, शतावरी शरीर का बल बढ़ाने वाला, कामोतेजक, मूत्र की मात्रा बढाने में व हल्दी खून साफ करने, त्वचा रोगों में उपयोग, दर्द निवारक, खांसी-जुखाम, डायबिटीज में उपयोगी, एंटी एलर्जिक है। अलसी का तैल दर्द निवारक एवं कब्ज दूर करता है। इसका बीज-अनचाहे कोलेस्ट्रोल को कम करता है एवं डायबिटीज व हृदय के लिए उपयोगी है। सर्पगंधा हाई ब्लड प्रेशर व नींद सम्बन्धी विकारों में उपयोगी है। गिलोय शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति बढाता है, बुखार, एसिडिटी, यूरिक एसिड जैसी बिमारियों से लड़नें में सहायक सिद्व होता है। अश्वगंधा शरीर में रोगों से लडने की शक्ति बढाता है, कामोतेजक, हाई ब्लड प्रेशर एवं नींद सम्बन्धी विकारों में उपयोगी होता है। अदरक पेट दर्द में उपयोगी, भूख व पाचन शक्ति बढाता है, बुखार व जोडो के दर्द में हितकर है।
    इसी प्रकार, दारूहल्दी पाईल्स, घाव, डायबिटीज, लीवर, त्वचा रोगों में उपयोगी है। अनार भूख एवं पाचन शक्ति बढाता है, एसिडिटी, रक्तस्त्राव जन्य विकारों व एनीमिया में उपयोगी है। अमलतास घाव भरने, सूजन, पेट फूलना, पीलिया, त्वचा रोग, कब्ज में उपयोगी है। आमला आयु को स्थिर रखता है, भूख व पाचन शक्ति बढ़ाता है, रक्तस्त्राव जन्य विकारों में उपयोगी, आंखों की रोशनी बढ़ाता है और डायबिटीज के ईलाज में भी उपयोगी है। अंजीर कब्ज, बुखार, खांसी, अस्थमा में उपयोगी होने के साथ-साथ बल बढाता है। बहेडा़ खांसी-जुखाम एवं रक्तस्त्राव में उपयोगी है। बेल कच्चा फल – दस्त, पक्का फल-कब्ज, छाल व पत्ते-दर्द और सोजिश में उपयोगी है। हरड़ कब्ज, पेट फूलना, डायबिटीज, घाव भरने में उपयोगी, आयु को स्थिर करता है व जामुन डायबिटीज, रक्तस्त्राव जन्य विकारों, दस्त रोग में उपयोगी है। इसी तरह, काचनर शरीर की गांठो, थाइरोइड की सोजिश, दर्द, डायबिटीज, मोटापा में उपयोगी है और नीम त्वचा रोगों एव घाव भरने, खून साफ करने में उपयोगी व डायबिटीज, बुखार, पेट एवं शरीर के कीड़े मारता है। सहिजन बीज तैल-जोडो के दर्द एवं सोजिश को कम करता है इसकी छाल व पत्ते- त्वचा में जलन, सोजिश व घाव को ठीक करते है व बुखार तथा मोटापा कम करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

    Follow on Google News Follow on Facebook
    Share. Facebook Twitter Email WhatsApp
    Recent
    • स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शांडिल ने किया विधिवत शुभारम्भ
    • हेल्दी बेबी शो 28 जून को ठोडो मैदान में होगा आयोजित
    • अग्निशमन विभाग का विशेष सत्र: अरिहंत इंटरनेशनल विद्यालय, नाहन में सुरक्षा का संदेश
    • किसान जल्द करवाएं किसान पंजीकरण, मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ – कृषि विभाग
    • मुख्यमंत्री ने जोहड़जी-मल्ला सड़क के लिए 20 करोड़ रुपये की घोषणा
    Recent Comments
    • Sandeep Sharma on केन्द्र ने हिमालयी राज्यों को पुनः 90ः10 अनुपात में धन उपलब्ध करवाने की मांग को स्वीकार किया
    • Sajan Aggarwal on ददाहू मैं बिजली आपूर्ति में घोर अन्याय
    © 2026 Himachal Varta. Developed by DasKreative.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.