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    Home»चण्डीगढ़»ब्याज माफी योजना से किसानों को बाहर रखना मोदी सरकार का किसान विरोधी होने का सबूत-बलबीर सिद्धू
    चण्डीगढ़

    ब्याज माफी योजना से किसानों को बाहर रखना मोदी सरकार का किसान विरोधी होने का सबूत-बलबीर सिद्धू

    By Himachal VartaNovember 1, 2020
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    ‘मनमोहन सिंह ने 71,000 करोड़ और कैप्टन सरकार ने 10,000 करोड़ के किसानी कर्जे माफ किए’

    ‘मोदी सरकार के किसान विरोधी फ़ैसले देश को फिर से भुखमरी का शिकार बनाएंगे’

    चंडीगढ़ (हिमाचलवार्ता)। पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और श्रम मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने आज यहाँ कहा है कि मोदी सरकार ने अपनी ब्याज माफी योजना से किसानों के कर्जे को बाहर रख कर अपना किसान विरोधी चेहरा एक बार फिर से नंगा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार के इस फ़ैसले से अब कोई संदेह बाकी नहीं रह गया कि प्रधानमंत्री मोदी कॉर्पोरेट घरानों की कठपुतली बनकर किसान, मज़दूर और गरीब विरोधी फ़ैसले ले रहे हैं।

    स. सिद्धू ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले पाँच सालों में कॉर्पोरेट घरानों को आठ लाख करोड़ रुपए की कजऱ् माफी दी है, जबकि कर्जे के बोझ के नीचे दबाकर ख़ुदकुशी करने के लिए मजबूर हो रहे किसानों का एक पैसा भी माफ नहीं किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने आज की ब्याज माफी योजना से किसानों को बाहर रखकर समाज के सबसे अधिक जरूरतमंद तबके का गला घोटा है।

    भारतीय जनता पार्टी को कॉर्पोरेट घरानों और धनाड़ व्यापारियों की जमात करार देते हुए स. सिद्धू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ही किसानों, मज़दूरों और गरीब वर्ग के वफ़ादार हैं, जिसने हमेशा ही इनका भला सोचा है। उन्होंने याद कराया कि मनमोहन सिंह की सरकार ने किसानों का 71,000 करोड़ रुपए का कजऱ् माफ किया था। स. सिद्धू ने कहा कि अकाली सरकार द्वारा छोड़े गए पंजाब की अत्यधिक बुरी वित्तीय हालत के बावजूद कैप्टन अमरिन्दर सिंह की सरकार ने तकरीबन 10,000 करोड़ रुपए के किसानों के कर्जे माफ किए हैं।

    स. सिद्धू ने कहा कि मोदी सरकार एक के बाद एक किसान-मज़दूर विरोधी कानून बनाकर मुल्क को फिर से भुखमरी के दौर में धकेलना चाहती है, जिसमें से पंजाब के किसानों ने अपनी मिट्टी, पवन-पानी और स्वयं को तबाह करके बाहर निकाला था। उन्होंने कहा कि कृषि सुधारों के नाम पर बनाए गए नए कानून, प्रस्तावित बिजली कानून और हाल ही में जारी किया गया वायु प्रदूषण रोकथाम अध्यादेश मुल्क को भुखमरी की तरफ धकेलेंगे। एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण का हवाला देते हुए स. सिद्धू ने कहा कि मुल्क की 14 प्रतिशत आबादी भुखमरी की शिकार है और यह संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। उन्होंने कहा कि इस सर्वेक्षण में शामिल 107 मुल्कों में से भारत का नंबर 94वें स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे मुल्कों की स्थिति भी भारत से कहीं बेहतर है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे किसान विरोधी फ़ैसले मुल्क के करोड़ों गरीब लोगों के मुँह में से रोटी छीनने का कारण बनेंगे। मोदी सरकार द्वारा पंजाब के साथ शुरु किए अनावश्यक टकराव की सख़्त शब्दों में निंदा करते हुए स. सिद्धू ने कहा कि भाजपा, पंजाब को फिर आतंकवाद की भठ्ठी में झोंक कर अपना राजनैतिक उल्लू सीधा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा के मंत्रियों द्वारा अपनी होंद बचाने के लिए धरनों पर बैठे किसानों को कभी शहरी नक्सली, कभी बिचोलीए और कभी बेरोजग़ार कहकर उकसाया और भडक़ाया जा रहा है। मोदी सरकार द्वारा पंजाब का ग्रामीण विकास कोष, जी.एस.टी. और रेल रोकने के फ़ैसले भी पंजाब का माहौल बिगाड़ सकते हैं।

    स. सिद्धू ने कहा कि मोदी सरकार को पंजाब और यहाँ के किसानों के साथ पैदा किए जा रहे टकराव का रास्ता छोडक़र बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए, जिससे इस मसले का कोई सार्थक हल निकाल कर किसानों की शक्ति को रचनात्मक काम में लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि इसमें ही पंजाब और मुल्क का भला है।

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