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    स्वास्थ्य

    शल्य चिकित्सा की जनक है आयुर्वेद पद्धति, आईएमए का विरोध करना गलत : डा. पारीक

    By Himachal VartaDecember 10, 2020
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    नाहन (हिमाचलवार्ता)। आयुष चिकित्सा अधिकारी संघ सिरमौर ने केंद्र सरकार द्वारा आयुर्वेद चिकित्सकों को शल्य चिकित्सा की अनुमति देने के लिए भारत सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय का आभार व्यक्त किया है।
     हिमाचल प्रदेश आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी संघ जिला सिरमौर के अध्यक्ष डा. प्रमोद पारीक ने बताया कि जिन चिकित्सकों ने बीएएमएस करने के बाद एमएस डिग्री प्राप्त की है उन्हें 58 प्रकार की शल्य चिकित्सा करने के लिए रेगुलेट किया गया है , जो भारत सरकार का सराहनीय कदम है।
    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी संघ जिला सिरमौर आईएमए सिरमौर द्वारा किये गए विरोध की कड़ी निंदा करता है। संघ का कहना है कि हजारों वर्षों पूर्व जब मॉडर्न सर्जरी का अस्तित्व भी नही था तब महान आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा ग्रंथ सुश्रुत संहिता को आधार मानकर शल्य चिकित्सा की जाती रही है, विश्व भर में आचार्य सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है।
    परंतु मुगलों और अंग्रेजों के शासन में इन्हें दबा दिया गया एवं विकसित होने का मौका नही दिया गया। फिर भी ये चिकित्सा कमोबेस प्रचलित रही, आजादी के बाद से अनेक प्रमुख आयुर्वेद संस्थानों में शल्य चिकित्सा की जाती रही है, हिमाचल के पपरोला स्थित राजीव गांधी स्नातकोत्तर संस्थान कांगड़ा क्षेत्र में जनरल व ऑर्थोपेडिक सर्जरी के लिए प्रसिद्ध है जहां आयुर्वेद के सर्जरी विषय मे तीन वर्ष का एमएस कोर्स वर्षो से चला हुआ है जहाँ से निकले शल्य के एमएस डॉक्टर सफलता पूर्वक शल्य चिकित्सा करते आ रहे है।
     केंद्र द्वारा पूर्व से ही प्रचलित इन चिकित्सा विधियों की अनुशंसा कर उन्हें उल्लेखित भर किया है जो कि पुरातन व पूर्ण वैज्ञानिक तकनीकियों को युगानुकूल विकसित होने का मौका व प्रोत्साहन देने का कार्य है।
    आधुनिक व आयुर्वेद शल्य चिकित्सक दोनों को मिलकर देश के ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्र के लोगों को सस्ती सुलभ चिकित्सा उपलब्ध कराने में ये प्रोत्साहन क्रांतिकारी कदम होगा, ऐसे में बिना पृष्ठभूमि व इतिहास व संभावनाओं को जाने आईएमए सिरमौर द्वारा तथ्यहीन विरोध एक पद्धति को विकसित करने के अधिकार से रोकना भर है।
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