नाहन (हिमाचल वार्ता न्यूज) :- लोक नृत्य प्रतियोगिता में जिला व खंड स्तर पर उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने पर शनिवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला देवठी मंझगाव में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया । जिसकी अध्यक्षता पदमश्री विद्यानंद सरैक ने की । उन्होने अपने संबोधन में कहा कि यह गौरव का विषय है कि बीते कई सालों से देवठी मंझगांव स्कूल ने लोक नृत्य प्रतियोगिता में प्रदेश में एक अलग पहचान बनाई है जिससे क्षेत्र व स्कूल का नाम रोशन हुआ है। उन्होने कहा कि संस्कृति हमें घुटटी में मिलती है जिसकी गरिमा बनाए रखनां हम सभी का नैतिक कर्तव्य है । उन्होने कहा कि सिरमौर की नाटी पूरे विश्व मंें प्रसिद्व है जिसे बच्चों ने विभिन्न विधाओं में प्रस्तुत करके स्कूल का नाम रोशन किया है । उन्होने लोक नृत्य में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने पर बच्चों व शिक्षकों को अपनी शुभकामनाएं दी और बच्चों को पुरस्कार भी वितरित किए ।
प्रधानाचार्य आन्नद पठानिया ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए बताया कि देवठी मंझगांव स्कूल के बच्चों ने अंडर-14 वर्ग के सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्र और बालिका वर्ग में विद्यालय ने खंड स्तर पर तथा जिला में छात्र वर्ग में 14 वर्षीय कम हुआ आयु वर्ग के छात्रों ने दूसरा और 19 वर्षीय छात्राओं तथा 14 वर्षीय छात्राओं ने खंड स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है और यह परंपरा बीते कई वर्षों से चली आ रही है । इस मौके पर सेवानिवृत जिला सहायक शारीरिक अधिकारी रमेश सरैक ने बताया कि विद्यालय लगातार पिछले कई वर्षों से सांस्कृतिक कार्यक्रम में जिला एवं खंड स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर चुका है। उन्होने भविष्य में भी इस परंपरा को निभाए रखने के लिए विद्यालय के शिक्षकों का आहवान किया ।
प्रधानाचार्य आन्नद पठानिया ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए बताया कि देवठी मंझगांव स्कूल के बच्चों ने अंडर-14 वर्ग के सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्र और बालिका वर्ग में विद्यालय ने खंड स्तर पर तथा जिला में छात्र वर्ग में 14 वर्षीय कम हुआ आयु वर्ग के छात्रों ने दूसरा और 19 वर्षीय छात्राओं तथा 14 वर्षीय छात्राओं ने खंड स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है और यह परंपरा बीते कई वर्षों से चली आ रही है । इस मौके पर सेवानिवृत जिला सहायक शारीरिक अधिकारी रमेश सरैक ने बताया कि विद्यालय लगातार पिछले कई वर्षों से सांस्कृतिक कार्यक्रम में जिला एवं खंड स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर चुका है। उन्होने भविष्य में भी इस परंपरा को निभाए रखने के लिए विद्यालय के शिक्षकों का आहवान किया ।
