मंडी ( हिमाचल वार्ता न्यूज़ ) वर्तमान में इस प्राकृतिक गुफा में ऐसे अनेक शिवलिंग निर्मित हो चुके हैं तथा यह प्रक्रिया अभी भी निरंतर जारी है। एक बड़ी पहाड़ी के नीचे स्थापित यह प्राकृतिक गुफा महादेव के प्रति आस्था रखने वालों को बरबस ही आर्किषत करती है।इस बीच प्राकृतिक तौर पर गिरती पानी की बूंदें जहां श्रद्धालुओं में महादेव के प्रति आस्था को मजबूत करती हैं, वहीं प्रकृति का एक अनुपम अनुभव भी मिलता है। बाहर से देखने पर इस प्राचीन गुफा में कई तरह की आकृतियां देखने को मिलती हैं, जो प्राकृतिक तौर पर स्वयं निर्मित हुई हैं। कहते हैं कि यह गुफा सदियों पुरानी है।
इसी प्राकृतिक गुफा के सामने एक विशाल चट्टान का छत्र है, जिसके नीचे भी भगवान शिव, महाकाली तथा हनुमान जी के मंदिरों के साथ नवग्रहों की भी स्थापना की गई है। इस प्राचीन धार्मिक स्थान की एक विशेषता यह है कि जब कभी लंबे समय तक वर्षा न हो तथा सूखा पड़े तो आसपास क्षेत्रों के लोग यहां एकत्रित होते हैं। इस दौरान प्राचीन गुफा में निर्मित शिवलिंगों का जलाभिषेक किया जाता है तथा यह प्रक्रिया तब तक जारी रखते हैं, जब तक जलाभिषेक का पानी प्राकृतिक गुफा के नीचे बह रही सरिता (खड्ड) में न पहुंच जाए।
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Thursday, June 4
