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    Home»हिमाचल प्रदेश»सोलन»अनारदाने को लंबे समय तक के लिए स्टोर कर सकेंगे। नौणी विवि के वैज्ञानिकों ने इसकी सफल तकनीक भी तैयार कर ली है।
    सोलन

    अनारदाने को लंबे समय तक के लिए स्टोर कर सकेंगे। नौणी विवि के वैज्ञानिकों ने इसकी सफल तकनीक भी तैयार कर ली है।

    By Himachal VartaSeptember 18, 2023
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    सोलन ( हिमाचलवार्ता न्यूज़ )   नौणी विवि के वैज्ञानिकों ने इसकी सफल तकनीक भी तैयार कर ली है। जिससे यह जल्दी खराब भी नहीं होगा और इसके गुण, रंग में भी कोई बदलाव नहीं होगा। विवि के इस शोध पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने अनारदाने के गुणवत्ता मानक भी प्रकाशित कर दिए हैं। इससे पहले उत्पादकों और व्यापारियों को अनारदाने की ग्रेडिंग के लिए कोई मानक उपलब्ध न होने के कारण अपने उत्पाद के लिए आम तौर पर कम कीमत मिलती है। अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी गुणवत्ता मान्य होगी। जानकारी के अनुसार किसानों में जानकारी कम होने के कारण फलों का तूड़ान उचित परिपक्वता पर नहीं किया जा रहा है। इससे अनारदाने की गुणवत्ता कम हो जाती है। परंपरागत रूप से जंगली अनार को काटकर दानों को निकालने के बाद बिना किसी पूर्व उपचार के खुली धूप में सुखाया जाता है, जो बी प्रक्रिया है और किसानों की ओर से तैयार अनारदाने में काफी नमी होती है। इसके अतिरिक्त इनमें रंग स्थिर नहीं होता, जिस के कारण सूखने के दौरान रंग फीका पडऩे लगता है। खराब गुणवत्ता वाला भूरे रंग का अनारदाना प्राप्त होता है। इसके अलावा दाने में अनार तितली के अंडे मौजूद होने से भंडारण के दौरान इनसे सुंडियां पैदा होती हैं जो अनारदाना को बहुत जल्दी खराब कर देती हैं। किसान अनारदाने में सुंडी पैदा होने के डर से इसे जल्दी से जल्दी किसी व्यापारी या मार्किट में बेच देने के लिए बाध्य होते हैं जिससे उन्हें उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिलता। यह है तकनीक नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. संजीव चौहान ने बताया कि खाद्य विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने अनारदाना पर काफी कार्य किया प्रदेश में अच्छी गुणवत्ता का अनारदाना बनाने के लिए अनार के फलों को फूलों के पूर्ण खिलने के 134-140 दिन बाद तोड़ा जाना चाहिए। जिसके बाद दानों को आसानी से अलग करने के लिए फलों को कैबिनेट ड्रायर या सोलर पॉली टनल ड्रायर में आंशिक रूप से सुखाया जाता है। जिसके बाद इसे उपचारित किया जाता है।

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