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    Home»हिमाचल प्रदेश»मंडी»बच्चों के अधिकारों की रक्षा और नशा-मुक्त समाज की दिशा में सामूहिक प्रयास जरूरी : अपूर्व देवगन
    मंडी

    बच्चों के अधिकारों की रक्षा और नशा-मुक्त समाज की दिशा में सामूहिक प्रयास जरूरी : अपूर्व देवगन

    By Himachal VartaNovember 11, 2025
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    मंडी  ( हिमाचल वार्ता न्यूज़ ):-   जिला परिषद हॉल मंडी में आज जिला प्रशासन मंडी और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के संयुक्त तत्वावधान में बाल अधिकारों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर एक दिवसीय जिला स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में शिक्षा, किशोर न्याय अधिनियम और पॉक्सो अधिनियम जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन रहे।
    उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इस सम्मेलन से जो भी सीख मिले, उसे व्यवहार में लाना सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई बार हम अपनी ड्यूटी निभाते हुए यह नहीं सोचते कि हमारा कार्य सही दिशा में जा रहा है या नहीं। ऐसे आयोजनों से हमें आत्ममंथन करने और अपने कार्य की दिशा को सुधारने का अवसर मिलता है। उपायुक्त ने कहा कि मंडी जिला हिमाचल प्रदेश का पहला जिला है जिसने इस प्रकार के बाल अधिकार सम्मेलन की मेजबानी की है और एनसीपीसीआर की योजना है कि इस तरह के कार्यक्रम देश के सभी जिलों में आयोजित किए जायें।
    नशा बच्चों के विकास की सबसे बड़ी बाधा
    अपूर्व देवगन ने कहा कि नशा बच्चों के भविष्य और विकास में एक गंभीर बाधा है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में नशा मुक्ति को भी चर्चा का प्रमुख विषय बनाया जाना चाहिए, क्योंकि यह बच्चों की क्षमता और जीवन के निर्माण में रुकावट डालता है। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को उनकी वास्तविक क्षमता तक पहुँचाने में मार्गदर्शन करें। उपायुक्त ने कहा कि किसी भी आपदा में बच्चों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, इसलिए आपदा प्रबंधन में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की सुखाश्रय योजना की सराहना करते हुए कहा कि यह योजना निराश्रित और असहाय बच्चों के लिए एक संवेदनशील और सराहनीय कदम है।
    भारत तभी विकसित होगा जब नई पीढ़ी सक्षम होगी
    अपूर्व देवगन ने कहा कि भारत तभी विकसित राष्ट्र बनेगा जब आने वाली पीढ़ी सक्षम और आत्मनिर्भर होगी। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की प्रतिभा और योग्यता को पहचानकर उन्हें सही दिशा में प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने जिला बाल संरक्षण अधिकारी से कहा कि इस सम्मेलन से प्राप्त दस प्रमुख बिंदु प्रशासन के साथ साझा किए जायें ताकि उन्हें भविष्य की नीति निर्माण और बाल सुरक्षा योजनाओं में सम्मिलित किया जा सके।
    बीते छह महीनों में एनसीपीसीआर ने 26,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया
    मुख्य वक्ता उमेश चंद्र शर्मा, वरिष्ठ सलाहकार, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कहा कि बाल अधिकारों से जुड़े मामले केवल आंकड़े नहीं होते, बल्कि हर एक मामला एक बच्चे और उसके परिवार की कहानी है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूर्णतया प्रतिबद्ध हैं और इस दिशा में सभी हितधारकों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि बीते छह महीनों में एनसीपीसीआर ने 26,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया है, 2300 बच्चों को बचाया है और 1000 से अधिक बच्चों को उनके गृह जिलों में पुनर्वासित किया गया है। उन्होंने बताया कि आयोग अब बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और बाल यौन शोषण सामग्री से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक विकसित करने पर कार्य कर रहा है।
    तकनीकी सत्रों में बाल सुरक्षा और कानूनों के क्रियान्वयन पर चर्चा
    सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों द्वारा आयोजित तकनीकी सत्रों में बाल सुरक्षा, शिक्षा और कानूनों के क्रियान्वयन पर गहन चर्चा हुई। ऋषभ दुबे, सलाहकार एनसीपीसीआर दिल्ली ने स्कूलों में बुलिंग और साइबर बुलिंग की रोकथाम पर विचार रखे। एन. आर. ठाकुर जिला बाल संरक्षण अधिकारी मंडी ने शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
    सम्मेलन में अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह, विभिन पाठशालाओं के प्रधानाचार्य, हेडमास्टर और शिक्षक, जिला बाल संरक्षण इकाई, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, पुलिस और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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