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    Home»चण्डीगढ़»हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री श्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि ज्यों-ज्यों मंडियों से खरीद की गई गेहूं का उठान गोदामों के लिए होता है त्यों-त्यों किसानों व आढ़तियों दोनों का भुगतान उठान के तीसरे या चौथे दिन हो जाता है
    चण्डीगढ़

    हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री श्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि ज्यों-ज्यों मंडियों से खरीद की गई गेहूं का उठान गोदामों के लिए होता है त्यों-त्यों किसानों व आढ़तियों दोनों का भुगतान उठान के तीसरे या चौथे दिन हो जाता है

    By Himachal VartaMay 23, 2020
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    himachal varta

    चंडीगढ़। हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री श्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि ज्यों-ज्यों मंडियों से खरीद की गई गेहूं का उठान गोदामों के लिए होता है त्यों-त्यों किसानों व आढ़तियों दोनों का भुगतान उठान के तीसरे या चौथे दिन हो जाता है। अब की बार किसान व आढ़ती की सहमति पर भुगतान की अदायगी पूल अकाउंट के माध्यम से करने की एक नई व्यवस्था की गई है।

    उप-मुख्यमंत्री श्री दुष्यंत चौटाला, जिनके पास खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग का कार्यभार भी है, ने कहा कि हरियाणा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों पर केन्द्र सरकार की गेहूं, चना, जौं, धान, ज्वार, बाजरा तथा मक्का जैसे खाद्यान्नों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना को अक्षरश: लागू करने वाला राज्य है। मंडियों में आई ऊपज का एक-एक दाना खरीदना सरकार की प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बावजूद सरकार द्वारा सरसों व गेहूं की खरीद प्रक्रिया की व्यवस्थित तरीके से की जा रही मॉनिटरिंग तथा निगरानी के फलस्वरूप ही कल तक 73 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ तथा आठ लाख से अधिक मीट्रिक टन सरसों की रिकॉर्ड खरीद संभव हो सकी है। इसके अलावा, 5,081 मीट्रिक टन से अधिक चने की खरीद की जा चुकी है।

    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि कोवडि-19 के चलते पूरा विश्व प्रभावित हुआ है। हर किसी को आरंभ में दिक्कत हुई थी। इसी के चलते सरकार ने सरसों की खरीद प्रक्रिया 5 अप्रैल से और गेहूं की 20 अप्रैल, 2020 से आरंभ की थी। उन्होंने कहा कि कुछ राजनेता लॉकडाउन के बावजूद सुचारू रूप से चल रही खरीद प्रक्रिया हजम नहीं कर पा रहे और मीडिया में तरह-तरह की ब्यानबाजी करने के आदी हो गए हैं जबकि वास्तविकता यह है कि किसान को उसकी गेहूं की फसल की खरीद का भुगतान तथा आढ़ती को उसकी ढ़ाई प्रतिशत आढ़त का भुगतान साथ-साथ हो, इसके लिए 22,000 करोड़ रुपये का कैश क्रेडिट का प्रबंध पहले ही किया जा चुका है।

    श्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि किसान ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पर दी गई जानकारी के अनुसार कितनी भी ऊपज ला सकता है, इसके लिए कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में हमेशा से ही गेहूं की खरीद मुख्य रूप से चार सरकारी खरीद एजेंसियों नामत: खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, हैफेड, हरियाणा भाण्डागार निगम तथा केन्द्रीय एजेंसी भारतीय खाद्य निगम द्वारा की जाती है जिसमें खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा 25 प्रतिशत, हैफेड द्वारा 45 प्रतिशत, हरियाणा भाण्डागार निगम द्वारा 18 प्रतिशत तथा भारतीय खाद्य निगम द्वारा 12 प्रतिशत की खरीद की जाती है। नैफेड के लिए सरसों की खरीद हैफेड द्वारा की जाती है।

    श्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि गेहूं के लिए इस बार मंडियों की संख्या जो आरंभ में 389 थी, इसमें 1507 नए अतिरिक्त केन्द्र जोडकऱ 1895 किया गया, जबकि सरसों के लिए इसे 71 मंडियों से बढ़ाकर 112 नए खरीद केन्द्र जोडकऱ 182 किया गया। इसी प्रकार, चने के लिए भी 30 मंडियां या खरीद केन्द्र स्थापित किए गए। उन्होंने बताया कि गेहूं की खरीद 1925 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों की 4425 रुपये प्रति क्विंटल तथा चने की 4875 रुपये प्रति क्विंटल की न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ खरीद की जा रही है।

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