नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज)(एसपी जैरथ):-हरिपुरधार की गहरी खाई में गिरी निजी बस ने सिर्फ 14 जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि सिरमौर में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक दावों की भी पोल खोल दी। शिमला से कुपवी जा रही इस बस में क्षमता से कहीं अधिक 66 यात्री सवार थे, जबकि पहाड़ी इलाकों की संकरी और जोखिम भरी सड़कें पहले ही अतिरिक्त भार झेलने की स्थिति में नहीं होतीं। हादसे में 14 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 52 लोग घायल हुए हैं। सवाल यह नहीं है कि दुर्घटना कैसे हुई, बल्कि यह है कि ऐसी स्थिति बनने दी ही क्यों गई। घना कोहरा, कड़ाके की ठंड और संकरी सड़क पर ओवरलोड बस का संचालन किसी तकनीकी चूक से ज्यादा, लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा नजर आता है। यह मान लेना कि केवल चालक ही इसका जिम्मेदार है, सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा, क्योंकि निजी बसों में ओवरलोडिंग बिना बस मालिकों की सहमति और परिवहन विभाग की अनदेखी के संभव नहीं हो सकती।
विडंबना यह है कि जिस दिन यह हादसा हुआ, उसी दौरान आरटीओ सिरमौर सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत जागरूकता कार्यक्रम चला रहा था। मंचों से नियमों की बातें हो रही थीं, लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि एक ओवरलोड बस मौत बनकर खाई में जा गिरी। इससे साफ होता है कि सड़क सुरक्षा महज औपचारिक अभियानों से नहीं, बल्कि निरंतर और सख्त निगरानी से सुनिश्चित होती है। यह पहला मौका नहीं है जब सिरमौर में लापरवाही ने जानें ली हों। वर्ष 2018 में श्री रेणुका जी मेले के दौरान ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार के कारण बस हादसे में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। तब भी जांच के आदेश हुए थे और सख्ती के दावे किए गए थे, लेकिन समय बीतने के साथ वे दावे कागजों तक ही सिमटकर रह गए। हरिपुरधार हादसा
