Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Breakng
    • स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनाव जनमत संग्रह साबित हुए, जनता ने कांग्रेस सरकार को पूरी तरह नकारा : डॉ. राजीव बिंदल
    • ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण से सिरमौर की युवतियां हो रही आत्मनिर्भर
    • आदेश जारी
    • पर्यावरण-अनुकूल विकास: संकटों के बीच समृद्ध हिमाचल का नया ब्लूप्रिंट
    • प्रदेश सरकार सड़कों का नेटवर्क बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत- विक्रमादित्य सिंह
    • आमजन को बेहतर परिवहन सुविधाएं प्रदान करना व हरित परिवहन को बढ़ावा देना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता- मुकेश अग्निहोत्री
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Himachal Varta
    • होम पेज
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सिरमौर
      • ऊना
      • चंबा
      • लाहौल स्पीति
      • बिलासपुर
      • मंडी
      • सोलन
      • कुल्लू
      • हमीरपुर
      • किन्नोर
      • कांगड़ा
    • खेल
    • स्वास्थ्य
    • चण्डीगढ़
    • क्राइम
    • दुर्घटनाएं
    • पंजाब
    • आस्था
    • देश
    • हरियाणा
    • राजनैतिक
    Wednesday, June 3
    Himachal Varta
    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»गर्मी से निजात पाने के लिए भेड़पालक चले पहाड़ों की ओर
    सिरमौर

    गर्मी से निजात पाने के लिए भेड़पालक चले पहाड़ों की ओर

    By Himachal VartaMay 8, 2026
    Facebook WhatsApp
    नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज) (एसपी जैरथ):-प्रदेश के निचले क्षेत्रों में पारा बढ़ने  साथ ही  भेड़ पालकों ने पहाड़ों का रूख कर दिया है । पूरे वर्ष भेड़पालक सर्दियों में मैदानी क्षेत्र और गर्मियों में पहाड़ों की ओर पलायन करते हैं । चिलचिलाती गर्मी, बरसात और ठिठुरती  ठंड में गडरिये अपनी भेड़ बकरियों के साथ  खुले मैदान में डेरा जमाए रहते हैं । गर्मियों  में अधिकांश चरावाहे नारकंडा, किन्नौर व डोडरा क्वार के जंगलों में अपनी भेड़ बकरियों के साथ रहते हैं ।
      किन्नौर के छितकुल से आए घुमंतु भेड़पालक छेरिंग का कहना है कि भेड़-बकरियों को पालना उनका पुश्तैनी व्यवसाय है इस परंपरा को कायम रखने के लिए वह साल भर घरों से बाहर रहकर अपना जीवन यापन करते हैं । इनका कहना है कि उनका जीवन बहुत संघर्षमय है परंतु वह इस कार्य से अभयस्त हो चुके है अन्यथा बिना छत के साल भर  बाहर रहना बहुत कठिन कार्य हैं। इनका कहना है कि किन्नौर में अब यह व्यवसाय काफी कम हो चुका है गिने चुने कुछ परिवार ही इस व्यवस्साय से जुड़े हैं जिसका मुख्य कारण युवाओं का शिक्षित होना भी है ।  इसी प्रकार डोडरा क्वार से भेड़-बकरियों आए रामदास कहना है कि विशेषकर निचने क्षेत्रों में  चारागाहों की भी कमी हो गई है जिस कारण इस पेशे से जुड़े  अनेक लोगों यह कार्य छोड़ दिया है । कहा कि पहले सरकार से चरागाह के परमिट आसानी से मिलते थे परंतु अब लोगों द्वारा शामलात भूमि पर कब्जे किए जाने के कारण उन्हें भेड़ बकरियों को चुराने के लिए बहुत कठिनाई पेश आ रही है ं ।
    गौर रहे कि प्रदेश के किन्नौर, डोडराक्वार, चंबा, पांगी इत्यादि के क्षेत्रों में घुमतु भेड़ पालकों की संख्या काफी अधिक है । पशु पालन विभाग के अनुसार प्रदेश के छः जिलों चंबा, कांगड़ा, कूल्लू, शिमला, किन्नौर और सिरमौर में भेड़ पालन का कार्य किया जाता है
    Follow on Google News Follow on Facebook
    Share. Facebook Twitter Email WhatsApp
    Recent
    • स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनाव जनमत संग्रह साबित हुए, जनता ने कांग्रेस सरकार को पूरी तरह नकारा : डॉ. राजीव बिंदल
    • ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण से सिरमौर की युवतियां हो रही आत्मनिर्भर
    • आदेश जारी
    • पर्यावरण-अनुकूल विकास: संकटों के बीच समृद्ध हिमाचल का नया ब्लूप्रिंट
    • प्रदेश सरकार सड़कों का नेटवर्क बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत- विक्रमादित्य सिंह
    Recent Comments
    • Sandeep Sharma on केन्द्र ने हिमालयी राज्यों को पुनः 90ः10 अनुपात में धन उपलब्ध करवाने की मांग को स्वीकार किया
    • Sajan Aggarwal on ददाहू मैं बिजली आपूर्ति में घोर अन्याय
    © 2026 Himachal Varta. Developed by DasKreative.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.