Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Breakng
    • जिला सिरमौर में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों का परिणाम : जिला निर्वाचन अधिकारी
    • पिकअप पलटने से युवक की मौत, चालक पर लापरवाही का मामला दर्ज
    • विकास खण्ड धर्मपुर के अंतिम चरण के निर्वाचन के परिणाम घोषित
    • विकास खण्ड कण्डाघाट के अंतिम चरण के निर्वाचन के परिणाम घोषित
    • विकास खण्ड कुनिहार के अंतिम चरण के निर्वाचन के परिणाम घोषित
    • विकास खण्ड सोलन के अंतिम चरण के निर्वाचन के परिणाम घोषित
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Himachal Varta
    • होम पेज
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सिरमौर
      • ऊना
      • चंबा
      • लाहौल स्पीति
      • बिलासपुर
      • मंडी
      • सोलन
      • कुल्लू
      • हमीरपुर
      • किन्नोर
      • कांगड़ा
    • खेल
    • स्वास्थ्य
    • चण्डीगढ़
    • क्राइम
    • दुर्घटनाएं
    • पंजाब
    • आस्था
    • देश
    • हरियाणा
    • राजनैतिक
    Tuesday, June 2
    Himachal Varta
    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»सिरमौर में जिमीकंद की खेती में ‘बिजामृत’ बना सफलता का मंत्र
    सिरमौर

    सिरमौर में जिमीकंद की खेती में ‘बिजामृत’ बना सफलता का मंत्र

    By Himachal VartaMay 10, 2026
    Facebook WhatsApp
    नाहन  ( हिमाचल वार्ता न्यूज):- प्रधान वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं डॉ. पंकज मित्तल और कृषि उपनिदेशक जिला सिरमौर डॉ. साहब सिंह ने बताया कि खेत में बिना उपचार किए जिमीकंद लगाने से फसल में सड़न, फफूंद और कई प्रकार के रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इसके विपरीत बिजामृत विधि से उपचारित बीज तेजी से अंकुरित होते हैं और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।उन्होंने बताया कि बिजामृत पूरी तरह प्राकृतिक जैविक उपचार पद्धति है। इसमें गाय का गोबर, गौमूत्र, गुड़, बेसन अथवा दाल का आटा और खेत की मिट्टी को मिलाकर विशेष घोल तैयार किया जाता है। जिमीकंद के कंद या बीज के टुकड़ों को इस घोल में कुछ समय तक डुबोकर रखा जाता है, जिससे उन पर मौजूद हानिकारक जीवाणु और फफूंद नष्ट हो जाते हैं। उपचार के बाद बीज को छाया में सुखाकर खेत में लगाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार जिमीकंद के लिए 500 से 750 ग्राम वजन वाले कंद के टुकड़े सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। बिजामृत उपचार से बीज की गुणवत्ता बेहतर होती है, पौधों का विकास तेज होता है और उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इसके साथ ही यह विधि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक दवाओं के उपयोग को कम करने में भी सहायक साबित हो रही है।
    Follow on Google News Follow on Facebook
    Share. Facebook Twitter Email WhatsApp
    Recent
    • जिला सिरमौर में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों का परिणाम : जिला निर्वाचन अधिकारी
    • पिकअप पलटने से युवक की मौत, चालक पर लापरवाही का मामला दर्ज
    • विकास खण्ड धर्मपुर के अंतिम चरण के निर्वाचन के परिणाम घोषित
    • विकास खण्ड कण्डाघाट के अंतिम चरण के निर्वाचन के परिणाम घोषित
    • विकास खण्ड कुनिहार के अंतिम चरण के निर्वाचन के परिणाम घोषित
    Recent Comments
    • Sandeep Sharma on केन्द्र ने हिमालयी राज्यों को पुनः 90ः10 अनुपात में धन उपलब्ध करवाने की मांग को स्वीकार किया
    • Sajan Aggarwal on ददाहू मैं बिजली आपूर्ति में घोर अन्याय
    © 2026 Himachal Varta. Developed by DasKreative.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.