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    Home»आस्था»पितृपक्ष में 12 साल बाद बना ऐसा संयोग, इन 5 जीवों को जरुर कराएं भोजन
    आस्था

    पितृपक्ष में 12 साल बाद बना ऐसा संयोग, इन 5 जीवों को जरुर कराएं भोजन

    By Himachal VartaSeptember 9, 2022
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    नाहन (हिमाचल वार्ता न्यूज) ( एस पी जैरथ)हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है। इसमें पूरी श्रद्धा के साथ पितरों को याद किया जाता है और उनके प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। विधि पूर्वक पितरों का श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर जाते हैं। माना जाता है कि हमारे पितृ कुछ जीवों के माध्यम से धरती पर हमारे निकट आते हैं। इनके माध्यम से ही वो आहार ग्रहण करते हैं। इसलिए पितृपक्ष के दौरान इन जीवों को भोजन जरूर कराना चाहिए।

    भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से श्राद्ध शुरू होने वाले हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, श्राद्ध पक्ष शनिवार, 10 सितंबर से शुरू होगा और रविवार, 25 सितंबर को इसका समापन होगा। ज्योतिषियों का कहना है कि इस साल श्राद्ध पक्ष 15 दिन की बजाए 16 दिन के रहने वाले हैं। पितृपक्ष में ऐसा संयोग 16 साल बाद आया है। इससे पहले ऐसा संयोग साल 2011 में बना था। इस बीच 17 सितंबर को कोई श्राद्ध कर्म नहीं किए जाएंगे।

    बता दें, पितृ पक्ष में पिंडदान का खास महत्व होता है। पिंडदान में दान-दक्षिणा किया जाता है जिससे पूर्वजों की आत्मा को शांति और मुक्ति मिल सके। श्राद्धपक्ष में इस दान का काफी महत्व है। माना जाता है कि पितृपक्ष में हमारे पितर धरती पर आकर हमें आशीर्वाद देते हैं। पितृ पक्ष में पितरों को तृप्ति तभी मिलती जब उन्हें अर्पित किए जाने वाले भोजन के पांच अंश निकाले जाते हैं। ये पांच अंश गाय, कुत्ता, चींटी, कौवा और देवताओं के नाम पर निकाले जाते हैं।

    श्राद्ध कर्म में भोजन से पहले पांच जगहों पर अलग-अलग भोजन का अंश निकाला जाता है। भोजन का ये अंश पत्ते पर गाय, कुत्ता, चींटी और देवताओं के लिए निकाला जाता है जबकि कौवे के लिए इसे भूमि पर रखा जाता है। फिर पितरों से प्रार्थना की जाती है कि वो इनके माध्यन से भोजन ग्रहण करें।

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