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    Home»हिमाचल प्रदेश»10 साल 1 महीने पहले नाहन के समीप “जंगली हाथी” ने गुजारा था एक दिन
    हिमाचल प्रदेश

    10 साल 1 महीने पहले नाहन के समीप “जंगली हाथी” ने गुजारा था एक दिन

    By Himachal VartaJune 2, 2020
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    नाहन। हालांकि पावंटा साहिब घाटी में हाथियों के उत्पात की बात सामान्य हो चुकी है। कई मर्तबा बातामंडी के आसपास के इलाकों में गजराज हाईवे पर भी नजर आ जाते हैं। इसकी तस्वीरें व वीडियो कैमरे में भी कैद होते आ रहे हैं। लेकिन इस बात को काफी कम लोग जानते होंगे कि अप्रैल 2010 में एक जंगली हाथी नाहन के समीप तक भी पहुंच गया था। यहां तक की औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब के मोगीनंद इलाके में एक फैक्ट्री की दीवार को भी तोड़ डाला था। वापसी में पॉपुलर के पेड़ों के बीच एक दिन बिताया था। दरअसल ऐसा माना जाता है कि जंगली हाथी रात के वक्त अनजान इलाके में कदमताल नहीं करता। सूरज की किरण फूटते ही रुक जाता है, दोबारा आगे बढ़ने के लिए रात के अंधेरे का इंतजार करता है। यही वजह थी कि गजराज को रिहायशी इलाके खेतो के नजदीक ही एक पूरा दिन गुजारा था।
    10 साल पहले शंभूवाला, बनकला, बोहलियों इत्यादि इलाकों में हाथी का आना-जाना सामान्य हो गया था। मगर इसके बाद गजराज ने कभी भी इस तरफ का रुख नहीं किया। दरअसल नेपाल की सीमा से उत्तराखंड होते हुए नाहन विकासखंड के कुछ हिस्से तक साल के जंगल का फैलाव है। इसी जंगल में हाथी की सबसे अधिक चहलकदमी रहती है। मोगीनंद तक पहुंचने के लिए हाथी ने अपने रूट का इस्तेमाल मारकंडा नदी के आसपास के जंगल का किया था। नाहन की तरफ आना संभव इस कारण नहीं था, क्योंकि चढ़ाई का सामना करना पड़ता। ऐसी भी धारणा है कि उत्तराखंड की तरफ से एक टाइगर भी कटासन देवी मां के मंदिर तक पहुंच जाया करता था। जिसके पंजों के निशान करीब 15 साल पहले भी मिले थे।
    कुल मिलाकर पावंटा साहिब उपमंडल ही समूचे प्रदेश में एक ऐसी जगह है, जहां पर गजराज अपने टोली के साथ नियमित तौर पर आने-जाने लगे हैं। इसके लिए वह यमुना नदी के जलस्तर में गिरावट आने का इंतजार करते हैं ,ताकि इसे पाकर हिमाचल में दाखिल हुआ जा सके। करीब 12 साल पहले हाथियों के गलियारे का निर्माण करने के लिए हरियाणा, हिमाचल व उत्तराखंड ने प्रयास शुरू किए थे जो धरातल पर सफल नहीं हो पाए।
    उधर बनकला में हाथी के सुबह के समय ठिकाना देखने के गवाह व पूर्व विधायक कंवर अजय बहादुर सिंह ने कहा कि करीब 12 साल पहले पड़ोसी राज्य से हाथियों का आवागमन शुरू हुआ था। उनका कहना था कि दस साल पहले एक हाथी ने बनकला एक पूरा दिन गुजारा था। रात को ही वन विभाग की टीम उसे रिहायशी इलाके से निकाल पाने में सफल हुई थी।

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