नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज)अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल, नाहन में 24 एवं 25 अक्टूबर, 2026 को केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के तहत ‘ *जॉयफुल मैथमेटिक्स* विषय पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन व सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्या श्रीमती स्टिमी मारिया ने वेन्यू डायरेक्टर के रूप में समन्वय की जिम्मेदारी निभाई, जबकि श्री कनिष्क कुमार ने एसटीएनसी के रूप में अपनी भूमिका निभाई।
कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को गणित शिक्षण की नवीन, रचनात्मक एवं प्रभावी विधियों से परिचित करवाना तथा विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि, तार्किक चिंतन और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यशाला में सीबीएसई रिसोर्स पर्सन *श्री रविंदर सिंह* जो अर्थशास्त्र में एम.ए. तथा गणित एवं अर्थशास्त्र में बी.एड. हैं। उन्हें गणित, अर्थशास्त्र एवं वैदिक गणित के शिक्षण का व्यापक अनुभव है। वे सीबीएसई के 50 से अधिक क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का संचालन कर चुके हैं।
दूसरे रिसोर्स पर्सन *डॉ. सुरेश अग्रवाल* एम.ए., एम.फिल. एवं पीएच.डी. की योग्यता रखने वाले अनुभवी शिक्षाविद्, लेखक, मानसिक गणित विशेषज्ञ एवं अंतरराष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर हैं। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में लगभग तीन दशकों का अनुभव है।
दोनों शिक्षाविदों ने उन्होंने गणित को केवल सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन के उदाहरणों, रोचक गतिविधियों, तार्किक पहेलियों तथा व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने के महत्व पर बल दिया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को विद्यार्थी-केंद्रित एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि गणित सीखने की प्रक्रिया अधिक सरल, सहज और आनंददायक बन सके।
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गणित को विद्यार्थियों के लिए भयमुक्त विषय बनाने हेतु शिक्षण में गतिविधियों, व्यावहारिक उदाहरणों, तार्किक पहेलियों और वैदिक गणित की तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। जब विद्यार्थी गणितीय अवधारणाओं को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़कर सीखते हैं, तो उनकी समझ अधिक स्पष्ट होती है और उनमें स्वयं समस्याओं का समाधान खोजने का आत्मविश्वास विकसित होता है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसी शिक्षण रणनीतियों से सशक्त बनाना था, जिनके माध्यम से विद्यार्थी गणित को रटने के बजाय उसकी अवधारणाओं को समझें, प्रश्न पूछें और अपने ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग करना सीखें। इस प्रकार की शिक्षण पद्धतियां विद्यार्थियों में रचनात्मकता, विश्लेषणात्मक सोच और स्वतंत्र चिंतन को बढ़ावा देने में सहायक हैं।
विद्यालय की प्रधानाचार्या *श्रीमती स्टिमी मारिया ने* कहा कि, “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता और जीवन की चुनौतियों का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना है। गणित ऐसा विषय है, जो बच्चों को तर्क करना, विश्लेषण करना और समस्याओं को नए दृष्टिकोण से देखना सिखाता है। इसलिए आवश्यक है कि गणित को भय का नहीं, बल्कि खोज, प्रयोग और आनंद का विषय बनाया जाए।
विद्यालय के चेयरमैन *श्री अनिल जैन,* महासचिव *श्री सचिन जैन* तथा *श्री सम्यक जैन* ने कार्यशाला के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला है। वर्तमान शैक्षिक परिवेश में विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकीय ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें तार्किक सोच, रचनात्मकता, व्यावहारिक समझ और आत्मविश्वास विकसित करना भी आवश्यक है।
विद्यालय प्रबंधन ने रिसोर्स पर्सन्स श्री रविंदर सिंह एवं डॉ. सुरेश अग्रवाल के अनुभव और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को नवीन शिक्षण तकनीकों से जोड़ने तथा विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और आनंददायक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रबंधन ने विद्यालय में शैक्षिक नवाचार, शिक्षक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़ी पहलों को निरंतर प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल, नाहन द्वारा इस कार्यशाला की मेजबानी करना शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास तथा शिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह कार्यक्रम गणित शिक्षण को अधिक रोचक, व्यावहारिक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के साथ विद्यालय में शैक्षिक नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में सार्थक प्रयास रहा।
