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    Home»हिमाचल प्रदेश»तूफान और ओलावृष्टि से स्टोन फ्रूट और सेब को हुआ करीब 50 लाख का नुकसान
    हिमाचल प्रदेश

    तूफान और ओलावृष्टि से स्टोन फ्रूट और सेब को हुआ करीब 50 लाख का नुकसान

    By Himachal VartaMay 8, 2020
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    भारी बारिश और ओलावृष्टि से हुए फलों के नुकसान का दृश्य।

    नाहन। भारी वर्षा, तूफान और ओलावृष्टि से राजगढ़ क्षेत्र में स्टोन फ्रूट और सेब की फसल को करीब 50 लाख का नुकसान हुआ है। जिससे पीच वैली के बागवान पर आर्थिक संकट मंडरा गया है। उद्यान विकास राजगढ़ डॉ. प्रतिभा चौहान ने बताया कि मार्च और अप्रैल में हुई भारी बारिश व ओलावृष्टि से हाब्बन वैली, भूईरा, दाहन, रासूमांदर और हरिपुरधार क्षेत्र में आड़ू, खुमानी, पल्म और सेब को भारी नुकसान हुआ है जिस कारण इस वर्ष विशेषकर स्टोन फ्रूट की बहुत कम फसल होने के आसार हो गए है।
    बता दें कि राजगढ़ क्षेत्र में तीन हजार हैक्टेयर भूमि पर किसानों द्वारा बगीचे लगाए गए है। जिसमें करीब साढ़े छः हजार मिट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है। इस वर्ष तूफान और ओलावृष्टि के कारण फलोत्पादन में भारी कमी आएगी। कृषि और बागवानी पर निर्भर किसानों को इस वर्ष आर्थिक रूप से भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
    बागवानों का कहना है कि बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने गत वर्ष पझौता क्षेत्र के प्रवास के दौरान चंदोल में एंटी हेलगन लगाने की घोषणा की गई थी परंतु एक वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी एंटी हेल गन नहीं लग पाई है । अगर सरकार द्वारा समय पर एंटी हेलगन लगाई होती तो ओलावृष्टि के कारण बागवानों को फलों को इतना भारी नुकसान न उठाना पड़ता।
    राजगढ़ क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान शेरजंग चौहान, अर्जुन मेहता, देवराज मेहता, विक्रम ठाकुर, पुष्पेन्द्र कंवर सहित अनेक बागवानों ने बताया कि जहां एक ओर लगातार भारी बारिश होने से आड़ू की फसल में टफरीना रोग लग गया है। वहीं दूसरी ओर तूफान और ओलावृष्टि ने पूरे स्टोन फ्रूट को तबाह करके रख दिया है। उन्होंने बताया कि टफरीना रोग आड़ू के पत्तों पर हमला बोलता है जिसके तहत पत्ता अपनी वास्तविक शक्ल को खो कर मोटा और आस्ट्रेलियन भेड़ों के कान की तरह लंबा हो जाता है। पत्ता हरा होने के स्थान पर सफेद हो जाता है।
    राजगढ़ क्षेत्र के बागवानों ने सरकार से मांग की है कि स्टोन फ्रूट और सेब को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए आवश्यक पग उठाए जाएं ताकि इस प्राकृतिक आपदा में बागवानों को कुछ राहत मिल सके।

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