शिमला ( हिमाचल वार्ता न्यूज़ ) अब विभागीय अधिकारियों को फेडरेशन के पदाधिकारी के तबादले से पहले मुख्य सचिव की संस्तुति नहीं लेनी होगी। प्रदेश में एनजीओ फेडरेशन के कमजोर होते वजूद व कर्मचारियों पर ढीली पड़ती पकड़ के मद्देनजर सरकार ने बदलाव किया है। प्रदेश में एनजीओ फेडरेशन कर्मचारियों का ताकतवर संगठन रहा है। कर्मचारियों की फेडरेशन पर पकड़ को देखते हुए 1981 में सरकार ने पदाधिकारियों के तबादलों को लेकर मुख्य सचिव से संस्तुति लेना अनिवार्य किया था। इसकी वजह पदाधिकारियों व फेडरेशन की कर्मचारियों में मजबूत पकड़ मानी जा रही है, मगर करीब ढाई दशक में राज्य में कर्मचारी फेडरेशन लगातार कमजोर पड़ती गई। न सिर्फ महासंघ कई गुटों में बंट गया, बल्कि इससे अलग हुए एक धड़े ने तो कर्मचारी परिसंघ का भी गठन किया था। प्रदेश में बीते दो दशकों में महासंघ के धड़ों में मान्यता को लेकर विवाद चलता रहा। पूर्व जयराम व इससे पहले स्वयं वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में भी महासंघ की धड़ेबाजी पूरी तरह से उजागर हुई। कर्मचारी महासंघ की संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) के निर्णय लागू ही नहीं हो सके। जाहिर है कि सरकारों को आभास हो गया था कि फेडरेशन की कर्मचारियों में पकड़ कमजोर हो गई है।
Breakng
- चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान’ के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
- शिवानी की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिला परिषद की बैठक
- वृक्षारोपण पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम – शरद कुमार लगवाल
- सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास की आधारभूत संरचना – संजय अवस्थी
- 19 व 20 जुलाई को विद्युत आपूर्ति बाधित
- सिरमौर में होगा मेगा जिला स्तरीय ‘‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’’ कार्यक्रम का आयोजन, 24 जुलाई तक करना होगा पंजीकरण।
Thursday, July 23
