मंडी ( हिमाचल वार्ता न्यूज़ ) सतलुज नदी में बाढ़ के साथ बड़ी मात्रा में देवदार की लकड़ी बहकर आने की सूचना मिलने पर वन विभाग की पांच सदस्यीय टीम पांच स्थानीय लोगों के साथ मोटर बोट पर एहण से रवाना हुई थी। एनटीपीसी कोल बांध के जलाशय से होकर टीम करीब चार बजे नेरी रोपडू पहुंची थी। यहां जलाशय के किनारे इकट्ठी हुई देवदार की लकड़ी का जायजा लिया था। उसके बाद टीम हाड़ाबोई की ओर रवाना हुई थी।मवेशियों के शवों का था अंबारकरीब साढ़े चार बजे टीम हाड़ाबोई पहुंची थी। हाड़ाबोई में करीब 250 मीटर के दायरे में लड़की व मवेशियों के शवों का अंबार था। लकड़ी को यहां से निकाल कैसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए। योजना बनाने के लिए मोटर बोट किनारे लगाने का प्रयास किया। लेकिन लकड़ी की चपेट में आने से मोटी बोट की ब्रेक की तार टूट गई। एक्सेलेरेटर जाम हो गया। मोटर बोट चालक ने तकनीकी खराबी को दूर करने का प्रयास किया।
मोटर बोट अनियंत्रित होकर सोलन जिले के छोर की ओर गईबटवाड़ा का रहने वो डागू राम उर्फ हेमराज ने जलाशय में कूद लकड़ी हटा रास्ता बनाने का प्रयास किया,लेकिन सफलता नहीं मिली। वह तैर कर जलाशय के एक किनारे पर पहुंच गया। मोटर बोट अनियंत्रित होकर सोलन जिले के छोर की ओर चली गई। बोट में सवार दस से आठ लोग तैरना जानते थे। तैर कर किनारे आ सकते थे। मोटरबोट संचालक नैन सिंह व वनकर्मी रूप सिंह को तैरना नहीं आता था,इसीलिए सभी ने बोट पर रुकने का निर्णय लिया।
डीएफओ सुंदरनगर को किया सूचितडीएफओ सुंदरनगर को सूचित किया। इसके बाद हरकत में आया प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में उतरा। पहले एनडीआरएफ को राफ्ट से भेजने का निर्णय लिया। रात को एनडीआरएफ का वहां पहुंचा संभव नहीं था। एनटीपीसी की हाईस्पीड बोट की सेवा लेने पर सहमति बनी। ऑपरेटर को घर से लेकर आए। रात 10 बजे स्पीड बोट कोल बांध से रवाना की गई। फंसे लोग बांध स्थल से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर थे। धुंध की वजह से स्पीड बोट रास्ता भटकती रही।
रात एक बजे एनडीआरएफ की टीम मोटर बोट तक पहुंची कई बार पीछे वापस आ गई। ऑपरेटर को स्थानीय लोगों ने टार्च और मोबाइल के सहारे रास्ता बताया। रात एक बजे एनडीआरएफ की टीम मोटर बोट तक पहुंची। वापसी पर स्पीड बोट फिर रास्ता भटक गई। खराब मोटर बोट को वहां से निकाल करला तक आगे चलाया। वहां से स्पीड बोट फिर आगे चली और रात तीन बजे फंसे लोगों को लेकर कोल बांध पहुंची। उपायुक्त मंडी रात तीन बजे तक कोल बांध में डटे रहे।
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Tuesday, July 21
