शिमला ( हिमाचल वार्ता न्यूज़ ) प्राकृतिक आपदा त्रस्त हिमाचल में वायु सेना व एनडीारएफ के जवान देवदूत साबित हुए हैं। बेशक प्रदेश सरकार ने बरसात से पहले संभावित प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए कमर कसी हो, मगर 7 से 10 जुलाई तक प्रदेश में प्राकृतिक विपदा की तीव्रता इतनी अधिक रही कि सरकार के इंतजाम बेबस साबित हुए।भारी बारिश व बादल फटने की वजह से नदियों के उफान पर आने व भूस्खलन की वजह से जगह जगह फंसे लोगों के रेस्क्यू के लिए अफसरशाही खासतौर पर सामान्य प्रशासन विभाग व राजस्व तथा आपदा प्रबंधन विभाग से जुड़े अधिकारियों ने सूझ बूझ का परिचय देते हुए वायु सेना व एनडीआरएफ से संपर्क साधा।
आपदा में घिरे लोगों को पहुंचाई गई दवाइयांजाहिर है कि यह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों पर हुआ होगा, मगर अफसरशाही की सूझबूझ की वजह से हिमाचल में सैंकड़ों जानें तो बची ही, सड़क संपर्क कटने की वजह से दूरदराज के इलाकों में आपदा में घिरे लोगों को दवाइयां व राशन भी पहुंचाया गया। दोनों ऑपरेशनों में वायु सेना व एनडीआरएफ ने प्रदेश पुलिस, होमगार्ड व अन्य ऐजेंसियों के साथ मिल कर अहम किरदार निभाया।
हैलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को बाहर निकालाआपदा के वक्त वायु सेना के दो चीता व एक बड़ा हैलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे रहे। हैलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को बाहर निकालने के साथ साथ दवाइयां व राशन पहुंचाने का काम किया गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के तीन गांवों को कुल्लू जिला से संपर्क कटा हुआ है। प्राकृतिक आपदा के दौरान शाकटी, मझान , शेनशेर गांवों में रहने वाले दर्जनों ग्रामीणों के पास राशन खत्म हो गया था। प्रशासन को इसकी सूचना मिली।
तीनों गांवों के निवासियों को 3300 किलो राशन पहुंचाया
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Thursday, July 23
